कोझिकोड, 30 जुलाई (आईएएनएस)। राज्य में पत्रकारों और वकीलों के बीच पहले से चल रही तनातनी के बीच शनिवार को मजिस्ट्रेट की अदालत से पुलिस एशियानेट टीवी चैनल के चार पत्रकारों को जबरन उठाकर सदर थाना ले गई।
अदालत में चल रहे महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कवर करने पहुंचे पत्रकारों के साथ पुलिस उप निरीक्षक पी.एम. विमोद ने कथित रूप से हाथापाई की।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि अदालत परिसर से मीडिया कर्मियों को हटाने के लिए जिला न्यायाधीश ने कहा था।
इस घटना पर मीडिया में बड़े पैमाने पर हो-हल्ला होने के बाद एशियानेट के चारों पत्रकारों को पुलिस थाने से जाने की इजाजत दी गई और सदर थाना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस घटना के लिए माफी मांगी।
एशियानेट के संवाददाता बिनूराज ने कहा, “हमलोगों के साथ अविवेकपूर्ण ढंग से पेश आने वाले इंस्पेक्टर और दो अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हम समुचित कार्रवाई की मांग करते हैं।”
उधर, कोझिकोड के जिला न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि मीडियाकर्मियों को अदालत परिसर में प्रवेश करने से रोकने के लिए पुलिस को कोई निर्देश नहीं दिए गए थे।
यह स्पष्टीकरण उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को दिया गया।
घटना के विरोध में राज्य की राजधानी में पत्रकारों ने मुंह पर कालीपट्टी बांधकर मूक रैली निकाली।
पूर्व विधायक, अधिवक्ता और माकपा के सदस्य सेबेस्टियन पॉल ने कहा कि राज्य की वर्तमान स्थिति उन्हें 1975 के आपातकाल की याद दिलाती है।
भारतीय मार्क्सवादी पार्टी (माकपा) समर्थित कैराली टीवी चैनल के प्रमुख और मुख्यमंत्री पी.विजयन के मीडिया सलाहकार जॉन ब्रित्तास ने कोझिकोड की घटना की निंदा की।
उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं होना चाहिए था, मीडिया को काम करने की आजादी मिलनी चाहिए।”
विरोधी दल के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि इन घटनाओं पर मुख्यमंत्री पी.विजयन को बयान देना चाहिए।
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