गुजरात के दलित नहीं उठाएंगे मृत पशु, चाहते हैं बंदूक (लीड-1)

अहमदाबाद, 31 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात में दलितों पर हमले के विरोध में हजारों दलितों ने रविवार को यहां सड़कों से मरे हुए पशुओं को नहीं उठाने का संकल्प लिया। दलित नेताओं ने हिंदू कार्यकर्ताओं के अत्याचार को देखते हुए रविवार को सरकार से दलितों को बंदूकें मुहैया कराने की मांग की।

पूरे गुजरात से जुटे करीब 30 दलित समूहों ने यहां एक रैली की। रैली में ही सामूहिक रूप से यह प्रण लिया गया कि मरे हुए पशु नहीं उठाएंगे। इस रैली को जमीयत-ए-उलेमा-हिंद का समर्थन हासिल था।

अहमदाबाद के तीन मुसलमान नेताओं ने इस रैली में भाग लिया और मंच पर बैठे। रैली में कई मुसलमान कार्यकर्ताओं को देखा जा सकता था।

30 दलित संगठनों के संयुक्त मोर्चा के संयोजक जिग्नेश मेवानी ने कहा, “सरकार हमें अपनी रक्षा के लिए अनिवार्य रूप से आग्नेयास्त्र रखने का लाइसेंस दे क्योंकि सरकार हमें सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रही है।”

उन्होंने कहा, “हम लोगों ने बहुत सह लिया। यदि ऊंची जाति के शोषकों ने हमें फिर उत्पीड़ित किया तो हम उनके हाथ-पैर तोड़ देंगे।”

उन्होंने कहा कि सरकार को दलितों को मार्शल आर्ट सिखाने में भी मदद करनी चाहिए।

दलितों पर वर्ष 2012 में हुए पुलिस के हमले का हवाला देते हुए वक्ताओं ने रैली में शिकायत की कि उस सरकार से कोई उम्मीद नहीं की जा सकती है जो आरोप पत्र भी नहीं दायर कर सकी है।

सुरेंद्र नगर जिले के धनगढ़ इलाके में हुए उस हमले में तीन दलित मारे गए गए थे। उन तीनों के परिवार वाले भी इस रैली में मौजूद थे।

वक्ताओं ने मांग की कि 11 जुलाई की घटना में मरी हुई गाय की खाल उतारने पर दलितों की पिटाई करने के आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न रोकथाम) कानून के तहत कार्रवाई की जाए।

गुजरात में ऐसा पहली बार हुआ है जब पूरे राज्य से 30 दलित समूह दशकों से मौजूद समस्याओं के खिलाफ एक साथ जुटे हैं।

इन लोगों ने उना दलित अत्याचार लाडात समिति के बैनर तले यह रैली की, जिसके संयोजक जिग्नेश मेवानी हैं।

मेवानी वकील हैं, जो दलितों के लिए कई अदालतों में मुकदमा लड़ रहे हैं।

हालांकि जहां रैली हुई, वहां की क्षमता करीब पांच हजार लोगों की ही थी, लेकिन रैली में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। हजारों लोग आसपास के खाली स्थानों पर खड़े दिखे।

आयोजकों ने कहा कि दलितों की ताकत दिखाने का मतलब इस समुदाय के उत्पीड़न के खिलाफ उनका विरोध है, खासकर उना में चार दलित युवकों की पिटाई का विरोध करना है।

वक्ताओं ने मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के लिए एक मांगपत्र भी जारी किया जिनमें उन सभी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई जो 11 जुलाई की घटना में चुप रहकर भी शामिल थे।

इसमें मृत पशुओं का चमड़ा उतारने का काम करने वाले दलितों के लिए वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करने की भी मांग शामिल है।

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