नई दिल्ली , 1 अगस्त (आईएएनएस)। किसी बेहतरीन डिजाइन से प्रेरणा लेना एक बात है, लेकिन क्या उसकी नकल करना भी उचित है? फैशन उद्योग को रचनाशील एवं नवाचारोन्मुख व्यक्तियों वाले समाज के तौर पर देखा जाता है।
फैशन जगत में डिजाइन चोरी विषय पर आयोजित एक समूह चर्चा के दौरान फैशन जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि कुछ व्यक्ति चर्चित डिजाइंस की नकल करने जैसा शार्टकट रास्ता अपना रहे हैं, जो फैशन उद्योग के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
ऑक्सफोर्ड स्टोर ने ‘फैशन उद्योग में डिजाइनों की चोरी’ विषय पर समूह चर्चा का आयोजन किया, जिसमें जे. जे. वलाया, कॉपीराइट विशेषज्ञ साफिर आर. आनंद और हार्पर बाजार इंडिया की संपादक नोनिता कालरा प्रतिभागियों में शामिल थे।
वलाया महसूस करते हैं कि आए दिन आयोजित होने वाली फैशन प्रदर्शनियों के कारण ही स्थानीय बाजार में नकली उत्पादों की भरमार है।
वलाया ने कहा, “यह एक गंभीर समस्या है। मेरे खयाल से प्रगतिशील देशों को ज्यादा फैशन प्रदर्शनियां आयोजित नहीं करनी चाहिए।”
वलाया को लगता है कि दोयम दर्जे समस्या की असली जड़ हैं, क्योंकि उन्हें कपड़े तो डिजाइनर चाहिए, लेकिन वे उसके लिए अधिक पैसे भी नहीं खर्च करना चाहते।
आईएएनएस ने वलाया से पूछा कि क्या इस समस्या से बचने के लिए किसी डिजाइनर को वृहद स्तर पर दोयम दर्जे के बाजार की जरूरत के हिसाब से सभी श्रेणी के डिजाइनों के साथ बाजार में आना चाहिए, तो उन्होंने कहा, “बाजार में ऊंचे दर्जे के फैशनेबल ब्रांड हैं तो उनके बरक्स स्थानीय ब्रांड भी हैं। आप कम कीमत में बेहतरीन और ढेर सारा काम चाहते हैं, जो संभव नहीं है। आप चाहते हैं कि नकली उत्पाद भी असली डिजाइन के जैसा ही दिखे, वहीं समस्या खड़ी होती है।”
कालरा ने वलाया से सहमति व्यक्त करते हुए कहा, “मेरे खयाल से इसके पीछे ऐसे लोग हैं जो लाजपत नगर जैसे बाजारों में खरीदारी करने जाते हैं और चर्चित डिजाइनों की नकल की मांग करते हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि इससे मूल डिजाइनर प्रभावित होता है।”
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