झारखंड में निवेशकों को लुभाने का प्रयास, भूमि अधिग्रहण का विरोध भी

रांची, 5 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में भाजपा और आजसू की गठबंधन सरकार जहां एक ओर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रोड शो कर रही है, वहीं विपक्ष ने भूमि अधिग्रहण और जनजातियों के अधिकारों की सुरक्षा करने वाले दो कानूनों में किए गए बदलाव के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने गुरुवार को नई दिल्ली में रोड शो किया, जबकि पकरी-बरवाडीह कोयला खनन परियोजना के लिए नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) द्वारा भूमि अधिग्रहण के विरोध में अदालत में गिरफ्तारी देने के लिए विपक्षी पार्टियों के नेता हजारीबाग गए।

विपक्षी नेताओं के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके जवाब में वे अदलत में गिरफ्तारी देने गए थे, लेकिन पुलिस ने इस आधार पर उन्हें गिरफ्तार करने से इनकार कर दिया कि मामले की जांच चल रही है।

अध्यादेश के जरिए छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी)और संथाल परगना काश्तकारी (एसपीटी) अधिनियम में बदलाव करने की सरकारी पहल का विरोध करने के लिए विपक्षी पार्टियां झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक (झाविमो-प्र) और कांग्रेस एकजुट हो गई हैं।

सीएनटी अधिनियम 1908 में बनाया गया था, जो अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की जमीन के हस्तांतरण पर रोक लगाता है। हालांकि एक जनजाति बिक्री, विनिमय, उपहार या इच्छापत्र के जरिए अपने थाना क्षेत्र के निवासी को अपनी जमीन हस्तांतरित कर सकता है।

इसी तरह एसपीटी अधिनियम झारखंड की संथाल जनजातियों के भूमि अधिकार को संरक्षण देता है।

विपक्ष का आरोप है कि रघुवर दास एक गैर जनजातीय मुख्यमंत्री हैं और वह प्रतिबंधित जनजातीय इलाकों में अपने घनिष्ठ उद्योगपतियों के लिए भूमि अधिग्रहण आसान बनाने के लिए इन दोनों कानूनों में बदलाव करना चाहते हैं।

इस मुद्दे पर राज्य विधानसभा की कार्यवाही पहले ही बार-बार बाधित होती रही है।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने आईएएनएस से कहा कि इन दोनों कानूनों में बदलाव के लिए राष्ट्रपति के पास भेजे गए अध्यादेश के खिलाफ उनकी पार्टी 9 अगस्त को विश्व जनजातीय दिवस पर आंदोलन करेगी।

अध्यक्ष शिबू सोरेन और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो के एक प्रतिनिधिमंडल ने तीन दिन पहले राष्ट्रपति से मुलाकात की और उनसे अध्यादेश राज्य को वापस लौटा देने की मांग की।

बड़कागांव ब्लॉक में पकरी-बरवाडीह कोयला खंड साल 2010 में एनटीपीसी को आवंटित किया गया था, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के कारण काम शुरू नहीं हो सका। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई थीं, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

अदालत में गिरफ्तारी देने के लिए हजारीबाग जाने वाले नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, जनता दल-युनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा और कांग्रेस की स्थानीय विधायक निर्मला देवी शामिल थीं।

प्रतिबंधित खनन क्षेत्र में कथित अनाधिकार प्रवेश करने के आरोप में इन नेताओं और अन्य चार सौ लोगों के खिलाफ गत 24 जुलाई को एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ये नेता भूमि अधिग्रहण के विरोध कर रहे ग्रमीणों से मिलने गए थे।

मरांडी ने कहा, “साल 2004 से चल रही लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक हम जीत नहीं जाएंगे।”

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