अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो ने आत्महत्या की (लीड-5)

इटानगर, 9 अगस्त (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल ने मंगलवार को अपने निवास स्थान पर खुदकुशी कर ली।

पुल की खुदकुशी से पूरा देश स्तब्ध है। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद 13 जुलाई को पद से हटना पड़ा था।

उपमुख्यमंत्री चौना मेन ने पुल की खुदकुशी की पुष्टि की है।

पुलिस ने कहा कि पुल (47) ने अपने घर में पंखे से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “जिस कमरे में पुल ने आत्महत्या की, हमें वहां से एक सुसाइड नोट भी मिला है। लेकिन मैं अभी इस बारे में अधिक बताने की स्थिति में नहीं हूं।”

पुल की आत्महत्या की खबर सुनते ही उनके समर्थकों सहित हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और वर्तमान में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

उग्र भीड़ मुख्यमंत्री आवास के बाहर इकट्ठा हो गई और पुल के लिए लाए गए ताबूत को नष्ट कर दिया।

प्रदर्शनकारियों ने चौना मेन के बाहर तैनात सुरक्षाबलों से भिड़ते हुए अंदर घुस आए और तोड़फोड़ की। उन्होंने कुछ वाहन भी नष्ट कर दिए।

इनमें से कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग की है कि पुल को आत्महत्या के लिए किसने उकसाया। उन्होंने खांडू सरकार के इस्तीफे की भी मांग की।

पुल को जरूरतमंदों की ओर सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार के लिए जाना जाता रहा। वह सार्वजनिक और निजी जीवन में ईमानदारी के लिए भी जाने जाते रहे।

पुल ने मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रत्येक शनिवार को जनता दरबार लगाना शुरू किया।

पुल के हेलीकॉप्टर से गंभीर रूप से घायल मरीजों को इटानगर और अन्य स्थानों पर ले जाया जाता रहा है।

खांडू ने मंत्रिमंडल की आपातकाल बैठक का आह्वान किाय और तीन दिन के शोक की घोषणा की।

आधिकारिक बयान के मुताबिक, “मंत्रिमंडल अपने वरिष्ठ सहयोगी और एक उम्दा नेता द्वारा उठाए गए इस कदम से स्तब्ध और दुखी हैं।”

खांडू ने पुल की पत्नी को लिखे पत्र में कहा, “इस दुख की कड़ी में आपको यह संदेश लिखते हुए मुझे बहुत दुख हो रहा है। मैं इस घड़ी में आपका दुख साझा करना चाहता हूं। मैं जानता हूं कि यह करना मुश्किल है।”

पेमा खांडू हालांकि 16 जुलाई को ही राज्य के मुख्यमंत्री बन गए थे, लेकिन पुल ने अभी मुख्यमंत्री आवास खाली नहीं किया था।

पुल मुख्यमंत्री नबाम तुकी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार से बगावत कर 19 फरवरी को मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन जुलाई में सर्वोच्च न्यायालय ने तुकी की सरकार बहाल करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद राज्य के कांग्रेस विधायकों ने पेमा खांडू को अपना नया नेता चुना।

मुख्यमंत्री बनने के बाद पुल और उनके समर्थक क्षेत्रीय राजनीति दल पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) से जुड़ गए थे। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद पुल एवं उनके समर्थकों ने मुख्यमंत्री के रूप में पेमा खांडू का समर्थन किया।

कांग्रेस सांसद इरिंग ने कहा कि वह पुल की खुदकुशी से स्तब्ध हैं।

उन्होंने कहा, “हो सकता है कि वह अकेलापन महसूस करते रहे हों। जब आपका दिमाग खाली होता है तो वह शैतान का घर होता है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पुल की मौत पर शोक संवेदना व्यक्त की है।

उन्होंने कहा, “मेरी संवेदना कालिखो पुल और उनके परिजनों एवं समर्थकों के साथ है। अरुणाचल प्रदेश के प्रति उनके सेवाभाव को हमेशा याद किया जाएगा।”

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वह कालिखो पुल के असामयिक निधन से दुखी और स्तब्ध हैं। “मेरी संवेदनाएं उनकी परिवार के साथ हैं।”

केंद्र सरकार की ओर से पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने पुल की निधन पर हैरानी जताते हुए कहा, “उनका बहुत ही उज्‍जवल भविष्य था, जो अधूरा रह गया।”

कम्युनिस्ट नेता डी.राजा ने इस खुदकुशी को ‘चौंका’ देने वाला बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को पता लगाना चाहिए कि आखिर क्या हुआ।

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे एवं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “हम बहुत दुखी हैं। वह सिर्फ 47 वर्ष के थे। हम पुल के परिवार के लिए प्रार्थना करते हैं।”

पुल हुलियांग विधानसभा क्षेत्र से पांच बार जीत दर्ज करा चुके थे। वह अरुणाचल प्रदेश सरकार में वित्त मंत्री, बिजली मंत्री एवं जनजातीय मामलों के मंत्री सहित कई पद संभाल चुके थे।

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