उप्र : 40 हजार सफाईकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

लखनऊ , 10 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में 40 हजार सफाईकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया राज्य सरकार ने शुरू कर दी है, लेकिन इसमें सामने आ रही विसंगतियों को लेकर भी अब आवाज उठने लगी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व मेरठ से विधायक लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर इन विसंगतियों को दूर करने की मांग की है।

वाजपेयी ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा कि उप्र सरकार राज्य में 40 हजार सफाईकर्मियों की भर्ती कर रही है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में विसंगतियां ही नजर आ रही हैं।

वाजपेयी ने कहा, “इसे लेकर पहले भी कई बार आवाज उठाई जा चुकी है। लेकिन सरकार की तरफ से कुछ नहीं किया गया।”

उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर पांच अगस्त को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, नगर विकास मंत्री आजम खान, मुख्य सचिव दीपक सिंघल, नगर आयुक्त मेरठ को पत्र लिखकर विसंगितयां दूर करने के बाद इस भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग की गई है।

वाजपेयी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है, “जारी किए गए शासनादेश में यह जिक्र किया गया कि सफाईकर्मियों की नियुक्ति को लेकर दो प्रमुख अखबारों में विज्ञापन निकालना होगा और विज्ञापन में 10 दिन की समय सीमा के भीतर आवेदन मांगे जाएंगे। लेकिन इनका सही तरीके से अनुपालन नहीं हो रहा है।”

वाजपेयी ने कहा है, “मेरठ में 2215 सफाईकर्मी कार्यरत थे। 29 अप्रैल को उनको निकाल दिया गया था, तब इन पूर्व सफाईकर्मियों को शासनादेश में उल्लिखित वरीयता का लाभ कैसे मिलेगा।”

वाजपेयी ने बताया कि इस भर्ती प्रक्रिया में अनारक्षित वर्ग के 1,177 तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के 636 यानी कुल 1,836 लोग भर्ती होंगे।

उन्होंने सवाल उठाया, “क्या ये लोग वास्तव में सफाईकर्मी के तौर पर काम करेंगे। हकीकत यह है कि नियुक्ति किसी और की होगी और काम कोई और करेगा।”

उन्होंने कहा, “संविदा भर्ती में भी आरक्षण की व्यवस्था कर दी गई है। इसका दुष्परिणाम यह होगा कि समान्य और पिछड़े वर्ग के चयनित लोग अपने वेतन का कुछ भाग खर्च कर दूसरों से सफाई का काम करवाएंगे। इससे वाल्मीकि समाज का आर्थिक शोषण व मानसिक उत्पीड़न शुरू हो जाएगा।”

वाजपेयी ने सफाईकर्मियों की नियुक्ति, वेतन निर्धारण एवं सेवा शर्तो को लेकर बनी नलकानी समिति एवं उनकी संस्तुतियों को लागू करने की मांग की है।

सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ भी आंदोलन कर रहा है। संघ के नेता जगदीश वाल्मीकि ने मांग की, “नगर विकास विभाग के जारी शासनादेश में संविदा सफाई कर्मचारी के पदों पर नियुक्ति के लिए लागू आरक्षण व्यवस्था को निरस्त किया जाए और सफाई कर्मचारी के पद पर ठेकेदारी प्रथा तत्काल बंद की जाए।”

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