नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने डिजिटल इंडिया का लक्ष्य हासिल करने के लिए खंडित दृष्टिकोण अपनाने के बजाए समग्र आयोजना की आवश्यकता पर बल दिया है।
सिन्हा ने बुधवार को यहां ‘डिजिटल इंडिया के लिए आईसीटी से उभरती प्रौद्योगिकियां और यूएसओएफ’ विषय पर एक संगोष्ठी का उद्घाटन किया और कहा कि इस क्षेत्र में नवाचार की आवश्यकता है, क्योंकि भारत सीमित संसाधनों के कारण विकसित अर्थव्यवस्थाओं का अनुकरण नहीं कर सकता। यूएसओएफ का अर्थ है -यूनिवर्सल सर्विस आब्लिगेशन फंड यानी सार्वभौम सेवा दायित्व निधि।
उन्होंने कहा कि अगर अगले 15 से 20 वर्षो के दौरान भारत उभरती हुई प्रौद्योगिकियों को आत्मसात नहीं कर पाया, तो देश का अस्तित्व दांव पर लग जाएगा।
सिन्हा ने अधिकारियों और सम्बद्ध पक्षों का आह्वान किया कि वे डिजिटल क्रांति के जरिए परिवर्तन का प्रधानमंत्री का लक्ष्य हासिल करने के लिए ‘वॉक द टॉक’ का अनुसरण करें। उन्होंने कहा कि अभी तक आईटी क्रांति से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों सहित समूची आबादी को डिजिटल दृष्टि से सशक्त बनाना हमारा दायित्व है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह काम सरकार अकेले नहीं कर सकती, इसलिए सभी पक्षों को इसमें सहयोग करना चाहिए।
सिन्हा ने आशा प्रकट की कि मार्च, 2017 तक एक लाख ग्राम पंचायतें आप्टिकल फाइबर केबल के जरिए जुड़ जाएंगी। इससे व्यापक ग्रामीण समुदायों को नेटवर्क ढांचे से जोड़ा जा सकेगा।
इस अवसर पर दूरसंचार सचिव जे.एस. दीपक ने कहा कि वित्त मंत्रालय यूएसओएफ के अंतर्गत धन आवंटित करने में तत्पर नहीं है। उन्होंने कहा कि इस फंड के अंतर्गत 70 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बावजूद अभी तक 40 प्रतिशत से भी कम धन आवंटित किया गया है।
ट्राई के अध्यक्ष आर.एस. शर्मा ने कहा कि देश में डिजिटल ²ष्टि से सशक्त समाज और ज्ञानवान अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए सरकारी-निजी भागीदारी निश्चित रूप से उत्कृष्ट विकल्प है।
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