हैदराबाद/विजयवाड़ा, 12 अगस्त (आईएएनएस)। हर 12 साल पर आयोजित होने वाला कृष्णा नदी का उत्सव ‘कृष्णा पुष्करालु’ दो तेलुगू भाषी राज्यों- तेलंगाना और आंध्र प्रदेश- में शुक्रवार को धूमधाम और धार्मिक उत्साह के साथ शुरू हो गया।
दोनों राज्यों के हजारों श्रद्धालुओं ने कृष्णा नदी में पवित्र स्नान किए और नदी तट पर स्थित मंदिरों में पूजा-अर्चना की।
कृष्णा नदी के तट पर प्रशासन द्वारा बनाए गए पुष्कर घाटों पर सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया।
12 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के लिए दोनों राज्यों ने श्रद्धालुओं को सुविधाएं मुहैया कराने हेतु वृहद इंतजाम किए हैं। दोनों राज्यों में छह करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान करने की उम्मीद है।
दोनों राज्यों-आंध्र प्रदेश और तेलंगाना- की सरकारें घाटों के निकट विभिन्न जगहों पर सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही हैं।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, उनकी पत्नी शोभा राव, राज्य के धार्मिक मामले के मंत्री इंद्रकरण रेड्डी और अन्य जन प्रतिनिधियों ने महबूबनगर जिले के आलमपुर मंडल में गोंडीमल्ला घाट पर पवित्र स्नान किए।
महबूबनगर और नलगोंडा जिले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तेलंगाना के प्रशासन ने 90 घाट बनाए हैं।
इन दो जिलों में 13,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और वृहद सुरक्षा इंतजाम के तहत स्नान घाटों के आसपास 555 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
राज्य सरकार ने नदी उत्सव के व्यापक इंतजाम पर 852 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। तेलंगाना के दो जिलों के स्कूलों और कॉलेजों में 12 दिनों की छुट्टी की घोषणा कर दी गई है, क्योंकि कर्मचारियों को पुष्करम की ड्यूटी पर तैनात किया गया है।
उधर, आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में दुर्गा घाट पर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी अपने सहयोगी मंत्रियों के साथ पवित्र स्नान किया। नायडू ने अपनी पत्नी भुवनेश्वरी के साथ पूजा-अर्चना भी की।
आंध्र प्रदेश के प्राधिकारियों ने भी उत्सव के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। कृष्णा, गुंटुर और कुरनूल जिलों में पवित्र स्नान के लिए 178 घाट बनाए गए हैं।
कृष्णा जिले में कृष्णा और गोदावरी नदी के संगम स्थल पर ‘नवा हराथी’ के साथ यह उत्सव गुरुवार रात को शुरू हुआ।
आंध्र प्रदेश में भी व्यापक सुरक्षा इंतजाम के तहत उत्सव के लिए 30000 पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं।
किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्राधिकारी अतिरिक्त सुरक्षात्मक कदम उठा रहे हैं। गत साल गोदावरी पुष्करालु के दौरान राजामुंदरी में एक घाट पर हुई भगदड़ में 29 लोगों की मौत हो गई थी।
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