नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कश्मीर में हिंसा के दौरान मारे गए शब्बीर अहमद मीर का शव निकालने के लिए कब्र की खुदाई तथा शव का पोस्टमॉर्टम श्रीनगर के जिला व सत्र न्यायाधीश की निगरानी में होगा।
बीते आठ जुलाई को हिजबुल मुजाहिदी के कुख्यात कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर घाटी में शुरू हुए व्यापक हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस उपाधीक्षक यासिर कादिर पर शब्बीर अहमद मीर (26) को उसके घर में छापेमारी के दौरान गोली मारकर उसकी हत्या करने का आरोप लगाया गया है।
नौ अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष तथा न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा था कि मामले से बेहद संवेदनशीलता से निपटना चाहिए। प्रेम व दुलार से सब संभव है।
अगली सुनवाई की तारीख पांच सितंबर मुकर्रर करते हुए पीठ ने कहा कि आगे का फैसला श्रीनगर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश करेंगे, जो शव को बाहर निकालने तथा पोस्टमॉर्टम के वक्त उपस्थित रहेंगे।
मृतक के पिता अब्दुल रहमान मीर की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने न्यायालय से आग्रह किया कि पुलिस उपाधीक्षक को शव की खुदाई और पोस्टमार्टम प्रक्रिया से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए।
सिब्बल से सहमति जताते हुए महान्यायवादी ने कहा, “हमें मामले की तह तक जाना चाहिए। मैं इस बात से सहमत हूं कि यह स्वतंत्र व निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए।”
सिब्बल ने कहा कि पारदर्शिता व आत्मविश्वास से घाटी के लोगों के बीच सही संदेश जाएगा।
श्रीनगर के न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश पर पुलिस उपाधीक्षक के खिलाफ ताजा प्राथमिकी दर्ज करने में असफल रहने पर प्रदेश के उच्च न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ अवमानना प्रक्रिया पर नौ अगस्त को रोक लगा दी थी।
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