नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के मिथिलांचल अंतर्गत दरभंगा संसदीय क्षेत्र से तीन बार प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद व पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी कीर्ति आजाद ने कहा कि मिथिला के ‘पाग’ को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाना चाहिए।
आजाद ने जोर देते हुए कहा कि पाग को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए वह अपना पूरा जोर लगाएंगे। उन्होंने पाग के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विशिष्टताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसकी उत्पति प्राचीनकाल में उस समय हुई थी, जब विभिन्न शाही परिवारों के लिए उनका विशेष ताज प्रचलन में आया।
उन्होंने कहा कि पगड़ी और टोपी के मिश्रित रूप ‘पाग’ को कालांतर में मिथिला के जन-जन अपने सिर पर धारण कर इसे अपनी पहचान मानने लगे। मिथिला में आज भी मांगलिक अवसरों पर लाल पाग पहनने का प्रचलन है। विद्वान पंडित सफेद पाग पहनते हैं। पाग कई रंगों में उपलब्ध है। जरूरत है कि सिर्फ मांगलिक अवसरों पर ही नहीं, आम दिनों में भी इसे अपनी पोशाक का हिस्सा बनाया जाए, ताकि यह प्राचीन धरोहर बची रहे।
आजाद ने खास बातचीत में मिथिलालोक फाउंडेशन के ‘पाग बचाउ अभियान’ की सराहना की और इस संस्था द्वारा निर्मित पाग में प्रयुक्त तकनीकी बारीकियों पर गौर करते हुए इसे कर्नाटक के शाही परिवार एवं उसके सांस्कृतिक प्रतीक सरताज जो कि एक फैशन ब्रांड के रूप में विकसित हो रहा है, से जोड़ा।
संसद के बाहर मिथिला के सांस्कृतिक प्रतीक पाग को पहनकर आजाद ने कहा कि मिथिलालोक के तत्वावधान में एक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाए और मिथिला एवं मैथिल के सांस्कृतिक उत्थान के लिए भारत की संसदीय कार्यसमिति के पटल पर इस पाग को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करवाने के लिए आवेदन दिया जाए।
आजाद ने पाग को बचाने के लिए मिथिलालोक के चेयरमैन डॉ. बीरबल झा के प्रयत्नों की प्रशंसा की और इस संस्था द्वारा बनवाए गए पाग के नवरूप की भी सराहना की।
पौराणिक पाग की संरचना में मौजूद खामियों को चिह्न्ति करते हुए उन्होंने पाग के नए स्वरूप को अत्यंत उन्नत माना। इन्होंने पाग को राष्ट्रीय पहचान दिलवाने में अपने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
सांसद आजाद ने मैथिली साहित्य और संस्कृति के पुनर्जागरण में कर्नाटक शाही वंश के योगदान का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि हाल ही में बिहार विधानसभा में कई सदस्य पहली बार पाग पहनकर सदन में उपस्थित हुए। यह मिथिला के लिए गौरव की बात है। आजाद ने मिथिलांचल के लोगों में आ रही सांस्कृतिक जागरूकता पर खुशी जाहिर की और उम्मीद जताई कि सम्मिलित प्रयासों से ‘पाग’ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा मिलेगी।
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