प्लॉस्टिक का झंडा नहीं, तिरंगे का अनादर नहीं : गृह मंत्रालय

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रीयता और देशभक्ति का उत्साह है। लेकिन देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते समय आप को यह तय करना होगा कि आप अपने राष्ट्रीय झंडे या दूसरे राष्ट्रीय सम्मान के चिन्हों का अनादर या अपमान तो नहीं कर रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को दिए सलाह में रविवार को ध्यान दिलाया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जनता के प्रयोग में आने वाले झंडे कागज के बने हों और इन कागज के झंडे को राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेल समारोहों के बाद जमीन पर न फेंका जाए।

इस तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन और समारोहों में प्लॉस्टिक के झंडे इस्तेमाल न किए जाएं। इस सलाह में राज्य प्रशासन को इसे इलेक्टॉनिक और प्रिंट मीडिया में विज्ञापन के रूप में दोहराने को कहा गया है।

गृह मंत्रालय ने जोर देकर भारतीय ध्वज संहिता 2002 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम कानून, 1971 के प्रावधानों के कड़ाई से अनुपालन का आग्रह किया है।

गृह मंत्रालय ने कहा है, “चूंकि प्लॉस्टिक के झंडे, कागज के झंडों की तरह जैविक रूप से नष्ट नहीं होते और इस तरह ये लंबे समय तक सड़ते नहीं हैं और प्लॉस्टिक के इस तरह के राष्ट्रीय झंडे का सही से निस्तारण, झंडे की गरिमा के अनुरूप करना एक व्यावहारिक समस्या है।”

मंत्रालय ने कहा है, “कागज के झंडों का इनकी गरिमा के अनुरूप अलग से निस्तारण होता है। प्लॉस्टिक के झंडे का इस्तेमाल नहीं करने के लिए ज्यादा प्रचार की जरूरत है, इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में विज्ञापन दिए जाने चाहिए।”

सलाह में दोहराया गया है कि राष्ट्रध्वज देश के लोगों की “आशाओं और आकांक्षाओं” का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए इसे सम्मान देना चाहिए।

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