रांची, 20 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी ‘ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन’ (एजेएसयू) ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित तौर पर अपने उस वादे से मुकरने को लेकर सीधे निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि जनजातियों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा करने वाले दो कानूनों को बदला नहीं जाएगा।
एजेएसयू के अध्यक्ष सुदेश महतो ने यहां संवाददाताओं से कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुमका में अपनी चुनावी रैली में, जिसमें मैं भी मौजूद था, कहा था कि कोई भी ऐसा पैदा नहीं हुआ, जो जनजातियों की भूमि छीन सके। उनके वादों के बावजूद दो भूमि अधिनियमों में बदलाव किया गया है।”
एजेएसयू राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार में भाजपा की सहयोगी है।
महतो ने कहा कि मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भी शपथ ग्रहण करने के बाद वादा किया था कि छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी) में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
उन्होंने राज्य सरकार द्वारा मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेजे गए अध्यादेश का जिक्र करते हुए कहा, “अब किन परिस्थितियों में दोनों भूमि अधिनियमों में बदलाव किया जा रहा है।”
उन्होंने कहा, “बदलावों के बाद भूमि को विवाह के लिए भवन और शॉपिंग मॉल बनाने के लिए और कृषि भूमि को गैर कृषि प्रयोजनों के लिए अधिग्रहित करने की अनुमति मिल जाएगी। गठबंधन साझेदार के तौर पर हम जानना चाहते हैं कि ऐसी क्या आवश्यकता थी कि अध्यादेश के माध्यम से परिवर्तन प्रस्तावित किए गए।”
महतो ने कहा, “झारखंड सरकार अपनी ही पार्टी के विधायकों, गठबंधन साझेदारों और विपक्षी पार्टियों से चर्चा किए बिना इतना बड़ा फैसला कैसे ले सकती है? राजनीतिक पार्टियों के अतिरिक्त राज्य की जनता से भी विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था।”
उन्होंने कहा कि सीएनटी और एसपीटी कानून झारखंड के जनजातीय और मूलवासी लोगों के हितों और भावनाओं के अनुरूप हैं और इन्हें लेकर अत्यंत संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।
विपक्षी पार्टियां झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), कांग्रेस, झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक पहले ही दोनों कानूनों में प्रस्तावित बदलावों के खिलाफ एकजुट हैं।
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