निदेशक ने बताया कि वर्ष 1980 में सात साल की उम्र में राजन को प्राणि उद्यान लाया गया था। अच्छी खुराक और बेहतर देखभाल के कारण वह सामान्य से अधिक उम्र तक जी सका।
उन्होंने कहा कि राजन के गले के नीचे उभरी ‘वी’ आकार की आकृति ही उसकी पहचान थी। इस प्राणि उद्यान के इतिहास में कई ऐसे वन्यजीव आए, जिनकी मौत सामान्य से अधिक उम्र जीने के बाद हुई। इनमें मादा बंदर हुक्कू रानी, मादा बब्बर शेर बेबी, सफेद बाघिन सोना को भुलाया नहीं जा सकता।
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