हालांकि उन्होंने चुनाव के संबंध में सवाल-जवाब से मना किया। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने से ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दा मां और बेटी के सम्मान की लड़ाई है। चुनाव अगले वर्ष होंगे, इसलिए हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि चुनाव की बात से मेरी लड़ाई कमजोर होगी। इसलिए इस बारे में कोई बात नहीं करें।
उन्होंने कहा कि वह एक बार मायावती से सबके सामने बैठकर कुछ सवाल करना चाहती हैं। वह स्वयं को बहन जी और देवी बोलती हैं। मैं उसी देवी से पूछना चाहती हूं कि आखिर जिस देश में बच्चियों को देवी मानकर पूजा जाता है। उसका अपमान करने का अधिकार उन्हें किसने दिया।
चुनाव भी सिर्फ उनके खिलाफ इसलिए लड़ूंगी, जिससे पता चल सके कि समाज के लोग किसके साथ हैं। उस देवी के, जिसने दूसरी देवी का अपमान किया या फिर मां-बेटी के सम्मान की लड़ाई लड़ रही महिला का समर्थन करेंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश बुआ-भतीजा का रिश्ता छोड़कर नसीमुद्दीन की गिरफ्तारी में भी मदद करें।
प्रेस वार्ता में मौजूद उनके पति व भाजपा से निष्कासित नेता दयाशंकर ने कहा कि वह अपने पैसा लेकर मायावती द्वारा टिकट दिए जाने वाले बयान पर कायम हैं, जिसकी उन्हें माफी मांगने के बाद भी सजा मिल चुकी है, लेकिन उनकी बूढ़ी मां और नाबालिग बेटी का अपमान करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं।
यह लड़ाई उनकी पत्नी स्वाति सिंह लड़ रही है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ उनकी पत्नी अफसरों को सीडी भी सौंप चुकी हैं। फिर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया।
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