शांतिपूर्ण कश्मीर के बिना भारत का भविष्य अधूरा : राजनाथ (राउंडअप)

श्रीनगर, 25 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जम्मू एवं कश्मीर में शांति के लिए एक भावुक अपील की। सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण कश्मीर के बिना भारत का भविष्य अधूरा है।

उन्होंने कहा कि जल्द ही एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए कश्मीर का दौरा करगा। वार्ता राज्य में लंबे समय से चल रही अशांति और हिंसा को खत्म करने के लिए होगी। अशांत घाटी में 9 जुलाई के बाद से करीब 70 लोगों की मौत हो चुकी है।

अपने दो दिवसीय कश्मीर दौरे के अंत में संवाददाता सम्मेलन में राजनाथ सिंह ने एक प्रमुख मांग स्वीकार करते हुए कहा कि पेलेट बंदूकों के विकल्प के तौर पर अनियंत्रित भीड़ को रोकने के लिए उपकरण के इस्तेमाल का फैसला ‘कुछ दिनों में’ कर लिया जाएगा।

अपने कश्मीर में प्रवास के दौरान, गृह मंत्री ने कहा कि वे करीब 300 लोगों से मिले। इसमें शामिल राज्य के सभी दलों के नेताओं के साथ उनकी ‘अच्छी वार्ता’ हुई।

मंत्री ने कहा, “हर कोई शांति बहाली चाहता है। हम इस हालात से बहुत दुखी है, हमें लोगों के जीवन के नुकसान का कष्ट है।” उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का सहयोग मिल रहा है।

अलगाववादी नेताओं के संदर्भ में गृह मंत्री ने कहा कि लोगों को कश्मीर के युवाओं के भविष्य से नहीं खेलना चाहिए।

उन्होंने कहा, “उन (युवाओं) के हाथ में किताब, कलम और लैपटॉप होने चाहिए पत्थर नहीं। हम कश्मीरी युवाओं का भविष्य भारत के भविष्य से जोड़ रहे हैं, और मैं कश्मीरी लोगों से मुसीबत पैदा करने वालों को पहचानने की अपील करता हूं।”

उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य आंतरिक रूप से कश्मीर से जुड़ा है।

राजनाथ ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के नेता जल्द ही घाटी में गतिरोध तोड़ने के तरीके और वार्ता के लिए यहां का दौरा करेंगे। ‘मैंने राज्य सरकार से इसके लिए तैयारियां करने को कहा है।’

अलगाववादी नेताओं को वार्ता के लिए आमंत्रित किए जाने के सवाल पर राजनाथ सिंह ने कहा कि जो लोग इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत में विश्वास रखते हैं, सरकार उनसे वार्ता के लिए तैयार है।

इस बार खास बात यह रही कि उन्होंने एक बार भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया और कश्मीर पर भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत बात किए जाने की बात भी नहीं दोहराया। शायद उन्हें लगा कि इससे घाटी में कोई नया बखेड़ा खड़ा हो सकता है।

केंद्रीय मंत्री का घाटी में अशांति के दौरान महीने भर में यह दूसरा दौरा था। हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी के 8 जुलाई को मारे जाने के बाद घाटी में छह साल बाद भयंकर अशांति पैदा हो गई है।

सुरक्षाबलों और उग्र भीड़ के बीच झड़पों में अब तक 67 नागरिकों की मौत हो गई है, जबकि हजारों की संख्या में लोग घायल हुए हैं। ज्यादातर लोग पेलेट बदूंकों की वजह से सैकड़ों आंशिक रूप से पूरी तरह से अंधे हो गए हैं।

महबूबा मुफ्ती ने सुरक्षा बलों द्वारा लोगों के मारे जाने को सही ठहराया और कहा कि गोलियों और पेलेट से मारे गए लोग घर से दूध या टॉफियां लाने नहीं निकले थे।

जब उनसे पूछा गया कि कश्मीरी प्रदर्शनकारियों पर सेना द्वारा पेलेट गोलियों के इस्तेमाल को वह कैसे सही ठहरा सकती हैं, जबकि वह साल 2010 में इसी तरह की अशांति के दौरान विपक्ष की नेता के तौर पर आम नागरिकों के मारे जाने की निंदा कर चुकी हैं, मुख्यमंत्री नाराज हो गईं और संवाददाता से दोनों स्थितियों की तुलना न करने को कहा।

उन्होंने वानी के मारे जाने का जिक्र करते हुए कहा, “आप गलत हैं। साल 2010 में जो घटित हुआ उसकी वजह माछिल में हुई फर्जी मुठभेड़ थी। इसमें तीन नागरिक मारे गए थे। आज तीन आंतकी एक मुठभेड़ में मारे गए और इसके लिए सरकार को कैसे दोषी ठहराया जा रहा है।”

उन्होंने कहा सख्त कर्फ्यू लगाए जाने के बाद भी लोग सड़कों पर निकल आए।

महबूबा ने कहा, “क्या कोई बच्चा सेना के शिविर से टॉफी खरीदने गया था? क्या 15 साल का एक लड़का जिसने पुलिस स्टेशन (दक्षिण कश्मीर में) पर हमला किया, क्या वह दूध खरीदने गया था?”

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गरीब कश्मीरी युवाओं का निहित स्वार्थो के लिए ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। मारे गए 90 फीसद लोग गरीब परिवारों से हैं।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता ने कहा कि सिर्फ 5 फीसद कश्मीरी लोग हिंसा का सहारा ले रहे हैं और बाकी 95 फीसद लोग शांति चाहते हैं..कश्मीर की समस्या के समाधान के लिए संवाद चाहते हैं।”

घाटी के दौरे के दौरान गृहमंत्री राजनाथ सिंह मुख्यधारा के सभी दलों और नागरिकों तथा खुफिया और सुरक्षा अधिकारियों से भी मिले।

कश्मीर के व्यापारी निकायों ने आम नागरिकों के मारे जाने के विरोध में हालांकि राजनाथ सिंह से मिलने से इनकार कर दिया।

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