छत्तीसगढ़ की ‘लता मंगेशकर’ लड़ रहीं मौत से

इन दिनों छत्तीसगढ़ की ‘लता मंगेशकर’ के रूप में विख्यात किस्मत की सांसें तो साथ दे रही हैं, पर स्वर लुप्त हो गए। किस्मत की उम्र 70 वर्ष के आसपास होगी। वह अभी लकवाग्रस्त होने के साथ ही कई अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। बीते शुक्रवार को उन्हें कोरबा के 100 बिस्तर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। किस्मत मूलत: सिकोलाभाठा दुर्ग की रहने वाली हैं। लेकिन इन दिनों वह कोरबा में अपने बेटी-दामाद के घर रहती हैं।

छत्तीसगढ़ लोक कलाकार संघ (रायपुर) की अध्यक्ष रमा दत्त जोशी ने बताया कि किस्मत अपने आप में पूरे प्रदेश के साथ-साथ देश के लिए भी ‘वन पीस’ हैं। लोक गायन के साथ-साथ उनके हाव-भाव से दर्शक झूम उठते थे।

रमा ने बताया कि वह शुक्रवार को कोरबा जाकर किस्मत बाई से मिली थीं। उन्होंने बताया कि किस्मत बाई की हालत बेहद चिंताजनक है। उन्होंने शासन की तरफ से भी किस्मत बाई को उचित इलाज के लिए मदद का आश्वासन दिया है।

किस्मत की बेटी जियारानी ने कहा, “मां की हालत दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है। मां को पेंशन के रूप में दो हजार रुपये मिलते हैं। पैसे के अभाव में मां को इलाज के लिए बाहर ले जाते नहीं बन रहा है।”

किस्मत बाई ने आठ वर्ष की उम्र से ही गीत-संगीत और कलाकारी से नाता जोड़ लिया था। उनकी गुरु बरतनीन बाई रहीं। बाद में उन्होंने आदर्श देवार पार्टी नाम से मंडली बनाकर कार्यक्रम देना शुरू किया था। उन्होंने रायगढ़, बिलासपुर, कांकेर, संबलपुर समेत प्रदेश के कई स्थानों पर कार्यक्रम दिया।

जानकारों का कहना है कि किस्मत बाई की गायिकी न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि उत्तरप्रदेश में भी धूम मचाई थी।

किस्मत परंपरागत शैली में करमा, ददरिया, झूमर को बहुत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती रही हैं। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक रंगमंच कलाकार हबीब तनवीर के साथ उन्होंने ‘मिट्टी की गाड़ी’, ‘चरनदास चोर’, ‘मोर नाव दामाद’ और ‘गांव के नाम ससुराल’ में भी काम किया था।

जानकारों का कहना है कि किस्मत बाई अपने जमाने की बेहतरीन नर्तकी भी रही हैं। गायन को पुश्तैनी पेशा मानने वाली अंचल की वरिष्ठ लोक गायिका के गाए गीत काफी लोकप्रिय हुए।

आकाशवाणी रायपुर से उनके गीतों का प्रसारण सुनने श्रोताओं का एक बड़ा वर्ग उत्साहित रहता। उनके गाए गीत ‘चौरा में गोंदा रसिया मोर बारी मा पाताल रे चौरा मा गोंदा’ को लोग आज भी नहीं भूले। साथ ही ‘चल संगी जुर मिल कमाबो रे..’ और ‘करमा सुने ला चले आबे गा करमा तहूं ला मिला लेबो’, ‘मैना बोले सुवाना के साथ मैना बोले..’ को श्रोताओं ने काफी पसंद किया है।

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