भोपाल, 2 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ 10 श्रमिक संगठनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का शुक्रवार को मध्यप्रदेश में भी व्यापक असर रहा। जगह-जगह सभाएं करके रैलियां निकाली गईं। भोपाल स्थित भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के कारखाने में भी कामकाज प्रभावित रहा।
राजधानी भोपाल के केद्रीय विभागों के दफ्तरों डाक विभाग, आयकर विभाग, कई बैंक, भेल में देशव्यापी हड़ताल का असर सुबह से ही दिखने लगा था। कामकाज प्रभावित रहा, दोपहर होने तक सभा और रैली का दौर शुरू हो गया।
बैंक कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी वी.के. शर्मा ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को श्रमिक विरोधी अपने विचार को त्याग देना चाहिए। यह एक दिन की हड़ताल तो केंद्र सरकार के लिए चेतावनी है, लिहाजा उसे समझ लेना चाहिए कि वह श्रमिक विरोधी नीतियों पर आगे नहीं बढ़े।
राजधानी के भोपाल स्थित भेल कारखाने में भी हड़ताल का असर रहा। इंटक के प्रदेश सचिव दीपक गुप्ता ने आईएएनएस को बताया कि कारखाने में कार्यरत 14 हजार कर्मचारी और ठेका श्रमिकों में से अधिकांश हड़ताल पर रहे, इससे कामकाज प्रभावित रहा। सुबह के समय श्रमिक भेल के द्वार पर पहुंचे और सभा कर सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की।
गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार भेल को टांसफार्मर आदि बनाने के ऑर्डर विदेशी कंपनियों को दे रही है। सरकार की इस नीति भी निंदा की गई।
इसी तरह राज्य के अन्य हिस्सों- इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर आदि स्थानों से भी हड़ताल रही।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव बादल सरोज ने एक बयान जारी कर बताया कि राज्य में श्रमिक संगठनों की हड़ताल पूरी तरह सफल रही। ग्वालियर के श्रमिकों ने सड़कों पर उतर कर अपना विरोध दर्ज कराया। श्रमिकों ने अपनी इस हड़ताल के जरिए एक जुटता दिखाई है।
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