झारखंड : बेघर होने का खतरा देख राजभवन के सामने जुटे हजारों लोग

रांची, 3 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड सरकार के एक नोटिस पर घर से बेदखल होने का खतरा झेल रहे हजारों लोगों ने शनिवार को रांची में राजभवन के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी घर बचाओ समिति के बैनर तले जुटे।

गत अगस्त महीने में जिला प्रशासन ने अनुसूचित क्षेत्र विनियमन (एसएआर) अदालत बंदोबस्त के जरिए अनुसूचित जनजाति के भूमि मालिक से जमीन खरीदने वाले गैर अनुसूचित जनजाति के लोगों को सौदे की वैधता साबित करने का नोटिस जारी किया था।

वैधता साबित करने में विफल रहने पर गैर अनुसूचित जनजाति के लोगों को सवाल के घेरे में पड़ी अपनी संपत्ति से बेदखल होना पड़ेगा।

यह नोटिस रांची के विद्यानगर, यमुनानगर, गंगानर, किशोरगंज, कंटाटोली, मौलाना आजाद कॉलोनी, चुटिया और अन्य इलाकों के लोगों को जारी किया गया है।

अगर ये नोटिस लागू किया जाता है तो एक लाख से अधिक लोग बेघर हो जाएंगे।

यह नोटिस छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 को लागू करने के हिस्से के रूप में जारी किए गया है, जिसके तहत जिला उपायुक्त की स्वीकृति के बिना जनजाति की भूमि की गैर जनजाति के हाथों बिक्री या हस्तांतरण निषिद्ध है।

हालांकि कानून की धारा 71 ए के तहत उस स्थिति में इसकी स्वीकृति दी गई, जब गैर जनजाति समुदाय के लोगों ने जनजाति भूमि खरीदकर उस पर साल 1969 से पहले घर बनाया है और वहां रह रहा है।

इस तरह के मामले में एसएआर अदालत एक क्षतिपूर्ति भी तय करती है। लेकिन इस धारा का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ और इसकी आड़ में फर्जीवाड़े किए गए।

अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रांची में 1.5 लाख से 2.7 लाख मकान जनजातियों की जमीन पर बने हुए हैं।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपनी बेबसी और चिंता जाहिर की।

धरना में भाग लेने वाली गंगानगर की निवासी मालती देवी ने कहा, “यह लड़ाई गरीबों के लिए है। हमने अपनी पूरी जिंदगी की बचत से जमीन खरीदी थी और अब हम बेघर किए जा रहे हैं।”

इसी तरह के विचार प्रकट करते हुए कुंती सिंह ने कहा, “यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है। हम कहां रहेंगे? हमने इस जमीन में अपनी सारी जमा पूंजी लगाई थी।”

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