रायपुर, 6 सितंबर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मानसून दगा दे गया है, राज्य में भीषण सूखा और भारी अकाल की स्थिति बनती जा रही है। सरकार ने राज्य में सूखे की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार को अपनी पहली रिपोर्ट भेज दी है।
रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है कि छत्तीसगढ़ के छह जिलों सहित 40 तहसीलों में पूर्ण रूप से सूखे के हालात बन रहे हैं। इन तहसीलों में औसत से कम बारिश होने के कारण खरीफ फसल चौपट होने के कगार पर है। धान की बियासी का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। समय पर राहत कार्य नहीं खोले गए तो राज्य से खेतिहर मजदूरों का अन्य राज्यों में पलायन हो सकता है।
इस संबंध में सूबे के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव के.आर. पिस्दा का कहना है कि सूखा प्रभावित इलाकों के किसानों की मदद के लिए जिला स्तर पर आपात कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। फसलों को बचाने की कोशिश की जा रही है। यही हालात रहे तो पेयजल व पशुचारा की भी समस्या उत्पन्न हो सकती है।
छत्तीसगढ़ में अब तक 873 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। सूबे के 27 जिलों में से 13 में औसत से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इनमें महासमुंद व बलौदाबाजार में 70 फीसदी से भी कम बारिश हुई है। रायपुर, गरियाबंद, कोरबा, बिलासपुर, मुंगेली, राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, धमतरी व बस्तर जिले में भी औसत से कम वर्षा हुई है।
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो खरीफ फसलों के नजरी आकलन के बाद एक और रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके आधार पर केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग की जाएगी। पिछले साल केंद्र से करीब 1275 करोड़ रुपये मिले थे।
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