नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस ने गुरुवार को ‘सर्ज प्राइसिंग’ के जरिये रेल किराये में बढ़ोतरी को नरेंद्र मोदी सरकार का तुगलकी फरमान करार दिया। साथ ही इसे वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में कहा, “आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते मूल्य और खाद्य पदार्थो की बेलगाम महंगाई से जूझ जनता को नरेंद्र मोदी सरकार ने राजधानी, दूरंतो और शताब्दी ट्रेनों में ‘फ्लैक्सी किराया प्रणाली’ के जरिए ‘सर्ज प्राइसिंग’ लागू कर जोर का झटका दिया है।
इसे वापस लेने की मांग करते हुए उन्होंने कहा, “यही समय है, जब मोदी सरकार अपनी गलती को महसूस करे और अपना तुगलकी फरमान वापस ले।”
सुरजेवाला की यह टिप्पणी भारतीय रेल द्वारा तीन प्रीमियम ट्रेनों में फ्लैक्सी प्राइसिंग की घोषणा करने के बाद आई है।
किराये की नई प्रणाली के अनुसार, हर 10 प्रतिशत सीटों के लिए टिकट बिक जाने के बाद एक तय सीमा तक 10 प्रतिशत किराया बढ़ता जाएगा और अंतिम बढ़ोतरी 50 फीसदी तक होगी।
सुरजेवाला ने कहा कि इन ट्रेनों के मूल किराये (बेस फेयर) में हर 10 प्रतिशत सीटों के टिकटों की बिक्री हो जाने के बाद 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती जाएगी। यह अधिकतम वृद्धि एसी थ्री, एसी टू टियर और कुर्सीयान सभी के लिए 50 प्रतिशत तक होगी।
उन्होंने कहा, “इसका अर्थ है कि जब टिकटों की मांग बढ़ेगी तो टिकटों की कीमत खुद ब खुद डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगी।”
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि इस मूल्य प्रणाली के जरिए ईमानदार मध्य वर्ग के परिवारों की जेब जलाकर हर साल 1000 करोड़ रुपये एकत्र कर लेने का कपटपूर्ण तरीका खेजा गया है। यह वर्ग अब भी रेलवे को इसकी खामियों के बावजूद यात्रा के लिए एक किफायती एवं सुकर विकल्प मानता है।
सुरजेवाला ने यह भी कहा कि रेलवे का दशहरा, दिवाली, छठ पूजा, ओणम और बकरीद जैसे त्यौहारों के पहले नौ सितंबर से सर्ज प्राइसिंग लागू करने का फैसला भारत की जनता को निचोड़ लेने की मोदी सरकार की जनविरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
dharmpath.com dharmpath