बिहार : पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की रिहाई की आस, जश्न की तैयारी

सीवान, 9 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन 11 साल बाद शनिवार को जेल से बाहर आ सकते हैं। अपने नेता की लंबी प्रतीक्षा के बाद शहर में आने की आस लगाए कार्यकर्ताओं ने उनके स्वागत की पूरी तैयारी की है। उधर, भागलपुर के केंद्रीय कारागार में बंद शहाबुद्दीन को सीवान से रिलीज आर्डर आने का इंतजार है।

पटना उच्च न्यायालय ने तेजाब से दो भाइयों की हत्या का चश्मदीद गवाह राजीव रौशन की हत्या के मामले में बुधवार को शहाबुद्दीन को जमानत दे दी थी।

राजद के सीवान जिला अध्यक्ष परमात्मा राम ने बताया कि पूर्व सांसद के जेल से बाहर आने की सभी कागजी कारवाई की जा रही है। शनिवार की सुबह पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के भागलपुर जेल से बाहर आना तय माना जा रहा है।

उन्होंने बताया कि भागलपुर जेल से ही वाहनों का काफिला पूर्व सांसद के साथ चलेगा। सीवान से पांच सौ गाड़ियां भागलपुर जाएंगी और वहां से जुलूस के शक्ल में वे निकलेंगे। जिले में आगमन पर सर्वप्रथम मलमलिया में स्वागत किया जाएगा। विभिन्न स्थानों में उनके आगमन को लेकर तोरणद्वार बनाए गए हैं।

पूर्व सांसद का काफिला सीवान होकर सीधे हुसैनगंज प्रखंड के प्रतापपुर स्थित पैतृक गांव तक पहुंचेगा। शहाबुद्दीन के 13 साल के बाद अपने पैतृक गांव आने को लेकर प्रतापपुर के लोग भी खुश हैं।

शहाबुद्दीन की पत्नी हिना ने कहा, “हमलोग 2003 से ही इंतजार कर रहे हैं। वे घर कब आएंगे। 13 साल से ज्यादा हो गए। ऊपर वाले के घर में देर है, अंधेर नहीं। ऊपर वाले पर भरोसा किए बैठे थे कि न्याय होगा ही और आज न्याय मिल गया।”

हिना ने बताया कि 13 अगस्त, 2003 को प्रतापपुर कांड के सिलसिले में वह अदालत में हाजिर हुए थे। वर्ष 2005 में जमानत मिली, पर घर नहीं आए। उन्हें फिर वर्ष 2005 में ही दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। तब से वह विभिन्न मामले में जेल में हैं। अब उनके आने का ही इंतजार है।

इस बीच सीवान के पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार साह ने कहा कि किसी भी हाल में विधि व्यवस्था भंग नहीं होने दी जाएगी। किसी को कानून को हाथ में लेने की इजाजत नहीं होगी।

इधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया कि दोहरे हत्याकांड के एकमात्र गवाह की हत्या के मामले में पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को जमानत मिलना सत्ता के इशारे पर पुलिस और सरकारी वकील की शिथिलता का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि यह तो महागंठबंधन की सरकार बनने के साथ ही तय हो गया था कि लालू प्रसाद की मदद से सत्ता पाने वाले नीतीश कुमार ‘सीवान के आतंक’ को ज्यादा दिनों तक जेल में नहीं रख पाएंगे।

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