विशाखापत्तनम, 14 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय शहरी विकास, आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने बुधवार को कहा कि देश का राजनीतिक वर्ग अब शहरी क्षेत्र की चुनौतियों के प्रति पहले से अधिक संवेदनशील हो गया है और उच्च गुणवत्ता के जीवन के लिए सक्षम बनाने के अलावा तेजी से आर्थिक विकास के हित में उन्हें जल्दी से जल्दी सुलझाने की जरूरत है।
नायडू ने बुधवार को विशाखापत्तनम में ‘ब्रिक्स में शहरी संक्रमण’ पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि नागरिकों, शहरी स्थानीय निकायों, राज्य सरकारों सहित सभी हितधारकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करने के बाद केंद्र सरकार ने शहरी जागरूकता के लिए 10 सूत्री रणनीति तैयार किया है और इस बदलाव के परिणाम मिलने शुरू हो गए हैं।
शहरी क्षेत्र में व्यापक बुनियादी ढांचे की कमी दूर करने के लिए संसाधनों को बहुत महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों और राज्यों में संसाधनों के प्रवाह को सक्षम बनाने के लिए केंद्र सरकार उपाय कर रही है। इसके लिए केंद्रीय सहायता बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट सिटी मिशन, कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (अमृत) और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत केंद्र सरकार 2018-19 तक मूलभूत शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार करने के लिए 1.13 लाख करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह मूलभूत बुनियादी ढांचे लिए जेएनएनयूआरएम के तहत 2004-14 के दौरान प्रतिबद्ध 33,902 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से दी जाने वाली बड़ी राशि है।”
नायडू ने कहा, “2015 से केंद्र सरकार की परियोजना की गति और पैमाने और निवेश मंजूरियों में 2015 से कई गुना वृद्धि की गई है और 1.84 लाख करोड़ रुपये की सहायता मंजूर की गई है। इसमें 33 मिशन शहरों की स्मार्ट सिटी योजना के अधीन 78,292 करोड़ रुपये, अटल मिशन के तहत 45,293 करोड़ रुपये और अन्य 56,231 करोड़ रुपये शामिल हैं, जो शहरी गरीबों के लिए सस्ते घरों के निर्माण के लिए दिए गए हैं।”
उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान शहरी क्षेत्र में 15,827 लाख करोड़ रुपये निवेश की मंजूरी दी गई है, जिसमें से आंध्र प्रदेश के लिए 4,571 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी गई है। इसमें 10,579 करोड़ रुपये शहरी गरीबों के लिए सस्ते मकानों के निर्माण के लिए, 3,595 करोड़ रुपये विशाखापत्तनम और काकीनाडा को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए और 1,540 करोड़ रुपये की राशि अमृत शहरों में जलापूर्ति और सीवरेज प्रणाली में सुधार के लिए शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स), देशों में तीन अरब से अधिक आबादी रहती है, जो दुनिया की आबादी का 53 प्रतिशत है और इन देशों का जीडीपी वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक-चौथाई है।”
उन्होंने इन देशों से अनुभव और ज्ञान को साझा करके शहरी संक्रमण से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने का अनुरोध किया।
ब्रिक्स देशों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और उद्योग के प्रतिनिधि इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
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