उन्होंने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में उद्योग लगाने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से बदल रहा है और टीम इंडिया के सदस्य के रूप में अन्य राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ का भी इसमें योगदान दर्ज हो रहा है।
उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ को आमतौर पर नक्सल प्रभावित राज्य के नजरिए से देखा जाता है। नक्सलवाद का प्रभाव लगभग समाप्त हो गया है। राज्य के सुदूर दक्षिण के इलाकों में भी हमने सड़क, बिजली, शिक्षा, चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, जिससे इन क्षेत्रों के स्थानीय जनता का सामाजिक-आर्थिक विकास हो रहा है।”
छत्तीसगढ़ में हो रहे विकास के बारे में रमन सिंह ने कहा कि भारतीय इस्पात प्राधिकरण द्वारा बस्तर क्षेत्र में लगभग 18 हजार करोड़ रुपये की लागत से अल्ट्रामेगा स्टील प्लांट की स्थापना की जा रही है। एक अन्य अल्ट्रामेगा स्टील प्लांट केंद्र सरकार के उपक्रम एन.एम.डी.सी. द्वारा 18 हजार करोड़ रुपये की लागत से बस्तर के ही नगरनार में बनाया जा रहा है। दल्लीराजहरा से रावघाट-जगदलपुर तक 235 किलोमीटर रेललाइन का निर्माण हो रहा है। बस्तर में 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है।
डॉ. सिंह ने बताया, “बिजली छत्तीसगढ़ राज्य के लिए बड़ी ताकत बन गई है। हमारी कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 24 हजार मेगावाट है, जो वर्तमान मांग की तुलना में पांच गुना ज्यादा है। इस उत्पादन क्षमता को वर्ष 2020 तक बढ़ाकर 35 हजार मेगावाट करने की हमारी योजना है।”
उन्होंने सम्मेलन में बताया कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ सरकार का बजट सिर्फ पांच हजार करोड़ रुपये के आस-पास था, जो कुशल वित्तीय प्रबंधन के कारण वर्ष 2016-17 में बढ़कर 76 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। उन्होंने बताया कि विगत 15 वर्षो में छत्तीसगढ़ के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) की दर में पांच गुना वृद्धि हुई है और यह 47 हजार करोड़ से 250 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों से कहा कि वर्ष 2010 के बाद से राज्य को छह लाख 59 हजार करोड़ रुपये (106 बिलियन यू.एस.डॉलर) के निवेश प्रस्ताव मिले, जो देश के कुल निवेश प्रस्तावों का 14 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, “चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 में हमने विभिन्न कंपनियों के साथ 55 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर एम.ओ.यू. किया है जो कोल गैसीफिकेशन, रेलवे, स्टील, डिफेंस, इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों से संबंधित हैं।
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