गुरुवार को प्रदेश पार्टी मुख्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता में डॉ. मसूद ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सपा सरकार वास्तव मंे परिवारवादी है। यही कारण है कि साढ़े चार साल के कार्यकाल में यह निश्चित नहीं हो पाया कि वास्तविक मुख्यमंत्री कौन है और किसके आदेशों एवं निदेर्शो का पालन उप्र की नौकरशाही कर रही है।
डॉ. मसूद ने कहा कि कानून और व्यवस्था के प्रश्न पर अखिलेश खुद कह चुके हैं कि ‘अधिकारियों की नियुक्ति मैंने नहीं की है।’
प्रदेश सरकार को उद्योगपतियों की सरकार बताते हुए डॉ. मसूद अहमद ने कहा कि सपा सरकार ने विगत वर्ष और इस वर्ष कुल मिलाकर लगभग 1300 करोड़ रुपये माफ कर दिया, जोकि किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का ब्याज था और किसानों को ही मिलना था, लेकिन सरकार ने अपनी कृपा की वर्षा चीनी मिल मालिकों पर करके उसे यह सिद्ध कर दिया कि वह किसान विरोधी एवं उद्योगपति हितैषी है।
रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सपा सरकार ने यूरिया खाद पर साढ़े हजार करोड़ रुपये टैक्स लेकर अपना खजाना भर लिया और किसान के साथ धोखा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने तय किया है कि रालोद किसान के हितों की रक्षा करने के लिए सड़कों पर लड़ाई लड़ने निकलेगा।
उन्होंने बताया कि दल आठ अक्टूबर को प्रदेशभर में धरना देकर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा। फिर 14 अक्टूबर के बाद किसी भी दिन विधानभवन घेराव की घोषणा की जाएगी।
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