नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने गुरुवार को यहां वर्ल्ड सस्टेनबल डेवलपमेंट समिट (डब्ल्यूएसडीएस) के पहले संस्करण का उद्घाटन किया। इसका आयोजना पर्यावरण संस्था एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (टेरी) की ओर से किया जा रहा है। इसमें जलवायु परिवर्तन से निपटने पर विचार किया जा रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमें जलवायु परिवर्तन की बढ़ोतरी को सीमित रखने के लिए दोहरा मार्ग अपनाना होगा। हमें भविष्य के विकास की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करने होंगे। यह लक्ष्य धरती के प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावशाली ढंग से इस्तेमाल की इजाजत देता है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की लगभग 18 प्रतिशत आबादी का घर है, जबकि हमारे पास दुनिया का मात्र चार प्रतिशत नवीकरणीय जल संसाधन है। दुनिया में ऊर्जा की जितनी खपत होती है, उसमें हमारी हिस्सेदारी छह प्रतिशत है।
मुखर्जी ने कहा कि बड़े पैमाने पर दोहन के कारण संसाधन कम हो रहे हैं और उनका पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप भविष्य के विकास के लिए संसाधनों की उपलब्धता घट गई है। इसने किसी अर्थव्यवस्था के भविष्य के टिकाऊ विकास पर एक सवालिया निशान लगा दिया है।
डब्ल्यूएसडीएस का विषय वस्तु है ‘बियोन्ड 2015 : पीपुल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस’। पहले के दिल्ली सस्टेनबल डेवलपमेंट समिट (डीएसडीएस) की जगह (डब्ल्यूएसडीएस) ने ली है। डीएसडीएस का आयोजन भी एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (टेरी) ही करता था। पहले डीएसडीएस का आयोजन वर्ष 2005 में किया गया था।
इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को सस्टेनबल डेवलपमेंट लीडरशिप अवार्ड से नवाजा।
उन्होंने जनता को यह भी सलाह दी कि वे बुद्धिमानी के साथ ऊर्जा के स्रोतों का इस्तेमाल करें। इसके लिए उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख किया जिन्होंने ऐसा किया था।
dharmpath.com dharmpath