नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 118.431 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया है। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 75 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 125 प्रतिशत तथा पिछले 10 वर्षो के औसत जल संग्रहण का 98 प्रतिशत है।
यहां जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इसी माह छह अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं, जो 60 मेगावॉट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं।
बयान के अनुसार, उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 13.54 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 75 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 85 प्रतिशत थी।
बयान में कहा गया है कि पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 16.03 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 85 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 71 प्रतिशत थी। पिछले 10 वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 79 प्रतिशत था।
बयान के अनुसार, पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं और इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 22.87 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 84 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 61 प्रतिशत थी। पिछले 10 वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 80 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है, लेकिन यह पिछले 10 वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से बेहतर है।
बयान के अनुसार, मध्य क्षेत्र में आने वाले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में 42.30बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 38.87 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 91 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 76 प्रतिशत थी।
इसी तरह दक्षिणी क्षेत्र में आने वाले आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 27.42 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 53 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 34 प्रतिशत थी।
बयान के अनुसार, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है, उनमें पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना और कर्नाटक शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कम है, उनमें हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, उत्तराखंड, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं।
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