चंडीगढ़, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब सरकार ने शुक्रवार को पाकिस्तान के साथ पंजाब की सीमा के दस किलोमीटर के दायरे में गांवों को खाली करने के अपने पहले के निर्णय को वापस लेने का निर्देश जारी किया।
यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के शुक्रवार के निर्णय के बाद उठाया गया जिसमें केंद्र सरकार ने अपने उस निर्णय को वापस ले लिया जिसके तहत पंजाब की 553 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगे गांवों को खाली कराया गया था।
इसके बाद अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट और फजिल्का जिलों के सीमावर्ती गांवों के निवासियों ने अपने सामानों के साथ अपने घरों की ओर लौटना शुरू कर दिया।
नौ दिनों के बाद ग्रामीणों को अपने घर लौटने की अनुमति दी गई है।
नियंत्रण रेखा के पार भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद गत 29 सितम्बर को गांवों को खाली करने के आदेश दिए गए थे।
पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने कहा कि सीमावर्ती गांवों को खाली कराने का आदेश राजस्थान के जैसलमेर में केंद्रीय गृह मंत्री के साथ पश्चिमी सीमावर्ती राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में लिया गया, जहां पाकिस्तान के साथ पूरी सीमा की स्थिति की समीक्षा की गई।
बादल ने पंजाब के मुख्य सचिव सर्वेश कौशल को निर्णय के बारे में बताया। सभी छह जिलों के उपायुक्तों से प्रभावित लोगों की उनकी गांव वापसी सही ढंग से सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाने को कहा गया।
पंजाब सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, “सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई की आशंका के मद्देनजर लोगों को सुरक्षित जगहों पर रखने के लिए पंजाब सरकार ने 1000 गांवों को खाली करने का आदेश दिया था। अब निवासियों को अपने-अपने घर वापस जाने की अनुमति दे दी गई है।”
प्रवक्ता ने कहा, “सरकार ने भारत-पाकिस्तान सीमा के आसपास रहने वाले निवासियों को पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया है।”
गांव खाली कराने और अचानक निर्णय वापस लेने से ग्रामीण परेशान दिखे।
डेरा बाबा नानक क्षेत्र के गुरजोत सिंह ने कहा, “गांव खाली करने का आदेश जारी करने से पहले उन्हें सही सूचना का इंतजार करना चाहिए था। ग्रामीणों के खर्चो और घर तथा काम से दूर रहने के कारण उन्हें हुई क्षति का भुगतान कौन करेगा?”
इलाका खाली करने के आदेश से सीमावर्ती गांवों के करीब 4 लाख लोग प्रभावित हुए थे। फसल, मवेशी और संपत्ति की चौकसी के नाम पर कई परिवारों ने अन्यत्र जाने से मना कर दिया था।
ग्रामीणों ने अधिकांश शिविरों में बदइंतजामी का आरोप लगाया था।
स्थिति पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया जाहिर करने और गांवों को खाली करने का आदेश जारी करने के लिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने पंजाब की शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन सरकार की आलोचना की थी।
किसानों में बढ़ते अंसतोष की वजह से केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर को धान की फसल की कटाई की अनुमति दे दी थी।
सुखबीर बादल के अनुसार, उन्होंने बैठक में राजनाथ सिंह से पांच अतिरिक्त सशस्त्र बटालियन बनाने की अनुमति मांगी जो पाकिस्तान सीमा के साथ सीमा सुरक्षा बल के पीछे दूसरी रक्षा पंक्ति का काम करेगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार पहले ही 75 जगहों को चिन्हित कर चुकी है जहां दूसरी रक्षा पंक्ति के रूप में सुरक्षा चौकियों को बनाने की जरूरत है।
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