कोलकाता, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा के चौथे दिन त्यौहार की उमंग, मेलमिलाप और सहभागिता के रूप में दिखी। नामचीन हस्तियों सहित सभी वर्गो के लोगों ने जगह-जगह पंडालों में सामुदायिक भोज का मजा लिया। लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के यहां महानवमी का पर्व मनाने पहुंचे।
बंगाली परंपरा के अनुसार, दुर्गा पूजा की शुरुआत देवी दुर्गा के उनके पुत्रों कार्तिक व गणेश और पुत्रियों सरस्वती और लक्ष्मी के षष्ठी के दिन धरती पर आने के साथ शुरू होती है और दशमी के दिन समाप्त होती है। दशमी को ही दशहरे के रूप में मनाया जाता है।
महानवमी के जश्न में पुरुष कुर्ता-पाजामा पहने और महिलाएं चमकदार साड़ियों में सजी धजीं नजर आ रही हैं। सभी अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और अन्य परिचितों को बधाई देते नजर आए।
पंडालों में माता दुर्गा की पूजा हुई, लोगों ने माता को लगाए गए भोग को ग्रहण किया। इनमें कहीं पूड़ी तो कहीं खिचड़ी, सब्जियां तो कहीं मछली, यहां तक कि बकरे का मांस भी दिखा।
मशहूर अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता को भी अपने दोस्तों के साथ पर्व मनाते देखा गया।
इस बीच, महानवमी का धार्मिक अनुष्ठान महा अष्टमी और महानवमी के संगम के समय रविवार की देर रात सांधी पूजा के साथ शुरू हुआ।
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी दुर्गा ने चंड और मुंड नाम के दो दैत्यों को महाष्टमी और महानवमी के सांधी के समय मारा था। इस तरह देवी को विजयी के रूप में पूजा जाता है और उन्हें उनका पसंदीदा खाद्य पदार्थ दिया जाता है।
इसके बाद महाआरती हुई। बहुत सारे परंपरागत घरों में सुबह की पूजा के अनुष्ठान की समाप्ति से पहले हवन का आयोजन किया गया।
दुनिया के इस हिस्से का यह सबसे बड़ा वार्षिक पांच दिवसीय महोत्सव है। यहां तक कि अखबारों के दफ्तर भी बंद हैं और दिन-रात सड़कें लोगों के हुजूम से पूरी तरह जाम हैं।
परंपरागत रूप से देवी दुर्गा की प्रतिमा में महिषासुर राक्षस का वध करते दिखाया जाता है। वह शेर पर सवार होती हैं और उनके सभी दसों हाथों में हथियार रहते हैं।
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