तिरुवनंतपुरम, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल सरकार ने राज्य में लगातार कम होती आंग्ल-भारतीय आबादी को शुक्रवार को आश्वासन दिया कि खत्म हो रही उनकी संस्कृति का संरक्षण किया जाएगा और उन्हें आरक्षण का लाभ भी मिलेगा।
केरल विधानसभा में नामित आंग्ल-भारतीय सदस्य जॉन फर्नाडिस ने कहा कि राज्य में आंग्ल-भारतीयों की आबादी घटकर 80,000 रह गई है और इस समुदाय के अधिकांश लोग कोच्चि, कोल्लम, कन्नूर तथा तिरुवनंतपुरम में रहते हैं।
सन् 1498 में वास्को डि गामा के भारत आने के समय से ही यह समुदाय केरल में मौजूद है और उसके बाद से पुर्तगालियों, फ्रेंच तथा ब्रिटिश लोगों की संतानों को केरल में आंग्ल-भारतीय करार दिया गया। लेकिन पिछले कुछ वर्षो में इनकी आबादी घटी है और उनकी अनोखी संस्कृति भी समाप्ति के कगार पर पहुंच चुकी है।
फर्नाडिस ने कहा, “आंग्ल-भारतीय समुदाय अब खुद को बचाए रखने के लिए सरकार की मदद का इंतजार कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि कुछ ही आंग्ल-भारतीय स्कूल हैं, जिन्हें पिछली सरकारों से सहायता मिली थी।
फर्नाडिस ने कहा, “हम राज्य सरकार से अपील करते हैं कि वे मौजूदा कुछ आंग्ल-भारतीय स्कूलों को आधुनिक बनाएं, क्योंकि समुदाय में कुछ लोगों के लिए मलयालम भाषा एक समस्या है और इसके बदले उन्हें विशेष अंग्रेजी पढ़ने का विकल्प दिया जाए। साथ ही राज्य के अन्य अल्पसंख्यकों समुदायों की तरह हमारे अपने कॉलेज नहीं हैं।”
फर्नाडिस ने आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए कोच्चि में एक सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना करने तथा सभी आंग्ल-भारतीय छात्रों के लिए विशेष भत्ता का प्रावधान करने की मांग की। केरल में आंग्ल-भारतीय छात्रों की संख्या एक हजार से भी कम है।
राज्य के संस्कृति मंत्री ए.के.बालन ने कहा कि सरकार संबंधित अधिकारियों तथा समुदाय के प्रतिनिधियों की एक बैठक बुलाएगी और फर्नाडिस द्वारा की गई मांगों पर विचार करेगी।
बालन ने कहा, “इस समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की श्रेणी में और सरकारी नौकरी के लिए उन्हें लैटिन क्रिश्चियन के साथ रखा गया है। हम फर्नाडिस की मांगों पर निश्चित तौर पर विचार करेंगे और जो भी जरूरत होगी उसे पूरी करेंगे।”
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