नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली-नोएडा-डायरेक्ट (डीएनडी) फ्लाइवे को टोल फ्री करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली नोएडा टोल ब्रिज कंपनी की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय शुक्रवार को सुनवाई करेगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान द्वारा याचिका की जल्द सुनवाई की अपील के बाद न्यायमूर्ति अनिल आर.दवे की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने गुरुवार को आदेश पारित किया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के बुधवार के एक आदेश के बाद डीएनडी टोल फ्री हो गया है।
उच्च न्यायालय का आदेश साल 2012 में फेडरेशन ऑफ नोएडा रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान आया है। याचिका में नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड द्वारा यूजर फीस के नाम पर लिए जा रहे टोल को चुनौती दी गई थी।
अनुमानित तौर पर डीएनडी टोल ब्रिज से रोजाना 1.5 लाख वाहन गुजरते हैं।
बुधवार को न्यायमूर्ति अरुण टंडन तथा न्यायमूर्ति सुमिता अग्रवाल की एक खंडपीठ ने घोषणा की कि टोल रोड पर चल रहे वाहनों को अब टोल टैक्स देने की जरूरत नहीं है। न्यायालय ने टोल वसूली को अवैध पाया और राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह सुनिश्चित करे कि अब और न वसूली करे।
डीएनडी फ्लाइवे साल 2001 में शुरू हुआ था। नौ किलोमीटर लंबी सड़क 407 करोड़ रुपये की लागत से बनी है और माना जाता है कि वह पहले ही दो हजार करोड़ रुपये वसूल चुकी है।
एनटीबीसीएल की देखरेख इंफ्रास्ट्रक्चर लिजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) करती है, जिसने ‘बिल्ट ओन ऑपरेट ट्रांसफर’ के आधार पर साल 2031 तक के लिए नोएडा प्राधिकरण व एनटीबीसीएल के साथ समझौता किया है।
निजामुद्दीन ब्रिज तथा ओखला बैराज के अलावा, डीएनडी फ्लाइवे नोएडा तथा दिल्ली के बीच सबसे व्यस्त मार्ग है।
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