उन्होंने कहा कि उप्र से निर्वाचित उनके 73 सांसद हैं, केंद्र सरकार में दर्जनभर मंत्री हैं और खुद प्रधानमंत्री भी यहीं से सांसद हैं। इसके बजाय वे गुजरात की कहानी सुनाते रहे। नीति आयोग बनाकर भाजपा ने कैसे उत्तर प्रदेश के राज्यांश में नौ हजार करोड़ रुपये का नुकसान किया है, यह तथ्य भी छुपा नहीं है।
चौधरी ने कहा कि उप्र में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चार साल में राज्य के विकास की जितनी जनहित की परियोजनाएं लागू की हैं, उसकी अन्य राज्य सरकारें भी प्रशंसा कर रही हैं, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को यहां कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा है। वह भूल गए कि सैफई (इटावा) में, जिस हवाईपट्टी पर उतरे वह सपा की ही देन है। जिस सड़क से वे गुजरे वह भी इसी सरकार ने बनाई है और इटावा के नुमाइश मैदान के, जिस मंच से वह जनता को बरगलाने की कोशिश में लगे थे, वह भी सपा ने ही बनवाया है।
चौधरी ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को अखिलेश सरकार के विकास कार्यो से चिढ़ है। सच तो यह है कि भाजपा के हाथ से गुजरात भी खिसकता जा रहा है। जिस गुजरात मॉडल का चुनाव में बखान करके भाजपा ने केंद्र में सरकार बना ली, तबसे किसान तबाह हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा सांप्रदायिकता का जहर घोलकर उत्तर प्रदेश में भी सत्ता में आना चाहती है। शाह सपा के खिलाफ कितनी भी साजिशें रच लें, वह कहीं सफल होने वाले नहीं हैं।
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