नोटबंदी पर संसद से बाहर लामबंद हुआ विपक्ष (राउंडअप)

नई दिल्ली, 16 नवंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने बुधवार को संसद के बाहर विभिन्न मोर्चो पर नोटबंदी के कारण ‘वित्तीय आपदा’ का सामना कर रहे आम आदमी की समस्याओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

तृणमूल की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना और दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) सहित कई अन्य दलों के साथ राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकाला और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

इस बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर तीखा प्रहार करते हुए उनसे काला धन रखने वाले ‘अपने मित्रों’ के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल के 40 सांसदों ने शिवसेना, आप और नेशनल कान्फ्रेंस के नेताओं के साथ राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकाला और राष्ट्रपति मुखर्जी को एक ज्ञापन सौंपा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हालांकि इस रैली में शामिल नहीं हो सके। आप के पंजाब से सांसद भगवंत मान ने इस रैली में आप का प्रतिनिधित्व किया।

राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है, “देश की परेशान-हाल जनता, जो छोटा-मोटा कारोबार और नौकरी कर अपना जीवन चला रही है और देश की ग्रामीण जनता की ओर से हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप अपने सर्वोच्च पद का उपयोग कर इस अघोषित वित्तीय आपदा और असुरक्षा से आम आदमी की रक्षा करने के लिए हस्तक्षेप करें।”

राष्ट्रपति से मिलने के बाद ममता ने पत्रकारों से कहा कि इस ‘काली योजना’ के कारण देशभर में कइयों की मौत हो चुकी है और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को दो लाख करोड़ का घाटा हुआ है।

ममता ने कहा, “नोटबंदी के कारण आज बाजार से सब्जियां, बच्चों के लिए दूध और मरीजों के लिए दवाएं नदारद हो गई हैं। करीब 20-30 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश की मौत तनाव के कारण हुई।”

ममता ने बैंकों की गैर-निष्पादित संपत्तियों में हुए इजाफे की जांच करवाए जाने की भी मांग की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना मध्ययुगीन दिल्ली के राजा मोहम्मद बिन तुगलक से करते हुए ममता ने नोटबंदी के फैसले की ‘कोई पूर्व तैयारी न होने’ की आलोचना की।

ममता ने कहा, “अब तो एटीएम का मतलब हो गया है ‘आएगा तो मिलेगा’।”

उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी ने इस फैसले को बिना कोई योजना बनाए लागू किया और इससे देश में वित्तीय विपदा तथा वित्तीय आपातकाल की स्थिति उत्पन्न हुई। देश को अराजकता की ओर ढकेल दिया गया।”

ममता ने नोटबंदी के फैसले के खिलाफ लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव लाने की बात भी कही।

ममता ने कहा कि राष्ट्रपति मुखर्जी ने उन लोगों की बातें ध्यान से सुनीं और वे लोग उनसे ‘उचित कार्रवाई’ करने की उम्मीद कर रहे हैं।

इस रैली में शामिल रहे शिव सेना के सांसद आनंदराव अडसुल ने कहा, “हम इस फैसले के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि जिस प्रकार उसे लागू किया गया, उस तरीके के खिलाफ हैं। इस मुद्दे पर हम तृणमूल का समर्थन करते हैं। इस फैसले को पूरी तैयारी के साथ लागू किया जाना चाहिए था।”

कांग्रेस ने भी मुद्दे को संसद के अंदर न उठाकर जनता के बीच ले जाने का फैसला किया। महाराष्ट्र के भिवंडी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक बड़े समूह को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विगत दो वर्षो में मोदी ने देश के कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के 110,000 करोड़ रुपये के ऋण माफ किए हैं, जिनकी मदद से देश चलाया जा रहा है।

राहुल गांधी ने कहा, “अब नोटबंदी के जरिए अपने इन उद्योगपति मित्रों को धन देने के लिए वह प्रत्येक नागरिक की जब से पैसे निकाल रहे हैं। इन उद्योगपतियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम मोदी के मित्रों और कालाधन जमा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं।”

उन्होंने भविष्यवाणी की कि नोटबंदी के बाद जमा किए गए 500 और 1000 रुपये के नोट एक साल के भीतर उन 15-20 उद्योगपतियों और अन्य की जेबों में चले जाएंगे।

मुंबई और ठाणे से आए बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की भीड़ से उन्होंने पूछा, “क्या आपको आपके 4000 रुपये मिले? क्या आपको नहीं मिटने वाली स्याही लगाई गई?” इस पर लोगों ने जोर से कहा- ‘नहीं’।

राहुल ने नोटबंदी के कारण देश में प्रत्येक नागरिक को हो रही पीड़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों को भारी कठिनाइयों के बीच रख दिया गया है।

उन्होंने कहा, “लेकिन, मोदी हंस रहे हैं और रो रहे हैं। जबकि, उद्योगपति या कालाधन जमा करने वाले पुराने नोट बदलने के लिए लंबी कतारों में नहीं खड़े हैं।”

इस बीच अरविंद केजरीवाल ने नोटबंदी के खिलाफ दिल्ली के आजादपुर मंडी में गुरुवार को एक जनसभा को संबोधित करने की घोषणा की है। इस जनसभा में ममता बनर्जी भी शामिल होंगी।

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