घाना की महिलाओं की आवाज है ‘लाइक कॉटन ट्वाइंस’ : लैला डिजांसी

पणजी, 24 नवंबर (आईएएनएस)। यहां चल रहे 47वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव में समीक्षकों द्वारा प्रशंसित घाना की फिल्म ‘लाइक कॉटन ट्वाइंस’ की टीम ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत की।

यह एक सोशल ड्रामा फिल्म है जो घाना के दूरदराज के एक गांव से संबंधित है। इसमें तुईगी नामक एक 14 वर्षीया लड़की की कहानी दिखाई गई है, जिसे त्रोकोसी बनाया जाना है। त्रोकोसी घाना के जनजातीय समुदायों में प्रचलित एक सामाजिक परिपाटी है, जिसके तहत युवा लड़कियों को देवताओं की दासी बनाया जाता है। ऐसा इस मान्यता के तहत किया जाता है कि उनके परिवार वालों द्वारा किए जाने वाले पापों का प्रायश्चित हो जाए।

फिल्म में मिकाह ब्राउन नामक एक अफ्रीकी-अमेरिकी स्वयंसेवी के बारे में दिखाया गया है, जो तुईगी के गांव में पढ़ाता है। वह परंपरा से हटकर तुईगी को एक नया जीवन देने के लिए चर्च, सरकार और इतिहास के साथ संघर्ष करता है।

फिल्म निर्माण के बारे में घाना मूल की अमेरिकी निदेशक लैला डिजांसी ने बताया कि फिल्म की कहानी विभिन्न देशों में होने वाले उनके अनुभवों पर आधारित है। यह फिल्म 20 सालों से उनके दिल के नजदीक थी और इसे बनाने में आठ साल लगे। निर्माण के दौरान उनके दल को तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दल के सामने सामाजिक बुराइयों से लेकर वित्तीय संकट तक आए।

उन्होंने कहा कि यह फिल्म दुनिया भर की और खास तौर से घाना की प्रताड़ित महिलाओं की अस्मिता के लिए संघर्ष करती है।

‘लाइक कॉटन ट्वाइंस’ को हाल में संपन्न हुए सवान्नाह फिल्मोत्सव में ‘नैरेटिव फीचर’ के लिए सर्वोच्च पुरस्कार दिया गया था।

घाना में व्याप्त नस्लवाद से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए फिल्म की सह-निर्माता अकोफा डीजानकुई ने कहा कि घाना में आज भी नस्लवाद की सामाजिक बुराई मौजूद है। उन्होंने कहा कि वह आशा करती हैं कि फिल्म से लोगों को शिक्षित करने में मदद मिलेगी और वे औपनिवेशिक अतीत की इस बुराई को त्याग देंगे।

फिल्म की एक अन्य निर्माता व्हिटनी वालसिन ने कहा कि कई दशकों से अमेरिका जैसे देश में भी नस्लवाद मौजूद है। उन्होंने कहा, “हम प्रगति कर रहे हैं, लेकिन अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना है। उम्मीद की जाती है कि हमारी फिल्म ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी और लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव लाएगी।”

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