नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय अर्थव्यवस्था को नियमों के उल्लघंन व मिलावटी तथा नकली उत्पादों के बढ़ते बाजार से हर साल भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे बढ़ते मामलों को देखते हुए ऑथेंटिकेशन सोलूशंस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (एएसपा) देश में पहली बार इंटरनेशनल ऑथेंटिकेशन कांफ्रेस 2017 आयोजित कर रहा है।
एसोसिएशन की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह कांफ्रेंस दिल्ली में 8-9 फरवरी को आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन एसपा व मैसे फ्रैंकफर्ट इंडिया दोनों मिलकर कर रहे हैं। कांफ्रेस का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाने और देश में जालसाजी जैसी समस्या का विश्लेषण करना है, इसके साथ ही उद्योग, शेयरधारकों और निर्णयकर्ताओं को एक साथ एक मंच पर लाना है, ताकि इस बढ़ते खतरे का समाधान प्रदान किया जा सके।
इस बारे में ऑथेंटिकेशन सोलूशंस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष यू.के. गुप्ता ने कहा, “आज जालसाजी कई अरब डॉलर का कारोबार है और इसे 21वीं सदी के अपराध के रूप में जाना जाता है। यहां तक कि आतंकवाद और जालसाजी के बीच स्थापित कड़ी-अब खुल रही है। भारत में भी यह लगभग सभी क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक जालसाजी गतिविधियों से भारत सरकार को वित्त वर्ष 2011-12 में 26,190 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा, जो वर्ष 2013-14 में 39,239 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था और यह दो साल में 49.8 फीसदी की विकास दर को दिखाता है।”
मैसे फ्रैंकफर्ट ट्रेंड फेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राज मानिक ने कहा, “जालसाजी सभी क्षेत्रों में हमारे ग्राहकों के कारोबार को प्रभावित करती है और हम अपने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित अभियान ‘नकल के खिलाफ मैसे फ्रैंकफर्ट’ के माध्यम से ब्रांड और उत्पाद चोरी के खिलाफ सुरक्षा के कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत में हमने अपने व्यापार और सम्मेलनों के माध्यम से ऑटो और फार्मा सेक्टर के लिए इस पहल का विस्तार किया है। इस सम्मेलन के साथ हम आईपीआर सुरक्षा क्षेत्र में उद्योग, सरकारी निकायों और संगठनों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा रखते है और इसके अलावा हम ज्ञान के आदान प्रदान और जालसाजी से प्रभावित सभी क्षेत्रों में विस्तार के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं।”
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