भोपाल, 23 जनवरी (आईएएनएस)। नोटबंदी से आमजन को हो रही परेशानियों को लेकर मध्य प्रदेश में चार वामपंथी दलों ने 26 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) कार्यालय में सोमवार को हुई वामदलों की बैठक में केंद्र सरकार के नोटबंदी के मकसद को उजागर करने का निर्णय लिया गया। बैठक में माकपा, भाकपा (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी), सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) और भाकपा-एमएल (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी -मार्क्सवादी-नेनिनवादी) ने हिस्सा लिया।
माकपा के राज्य सचिव बादल सरोज ने आईएएनएस से कहा, “इस आंदोलन के तहत जहां लोगों को जागरूक किया जाएगा, केंद्र सरकार की मंशा बताई जाएगी, वहीं पुतलों का दहन भी किया जाएगा।”
बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है, “नोटबंदी को लेकर किए गए कालाधन, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, नकली नोट पर लगाम लागाने के दावे झूठे साबित हुए हैं। कोई काला धन नहीं आया, उल्टे नकली नोट असली हो गए, आतंकी हमले बढ़े और भ्रष्टाचार दोगुना हो गया।”
बयान में कहा गया है, “राज्य के मंत्री संजय पाठक के मामले जैसे सैंकड़ों ऐसे मामले हैं, जिनसे साफ हो गया है कि नोटबंदी कालेधन को सफेद बनाने का माध्यम बनी।”
ज्ञात हो कि पाठक पर कटनी जिले में 500 करोड़ रुपये के हवाला कांड में शामिल होने का आरोप है।
बयान में आरोप लगाया लगाया गया है, “नोटबंदी के बाद फसल के दाम न मिलने, खाद-बीज के पैसे न होने के कारण किसान तबाह हो गए हैं। नोटबंदी के बाद के प्रथम महीने में ही 35 लाख मजदूरों के काम छिन गए। असंगठित क्षेत्र व मनरेगा के करोड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए। किसानों की आत्महत्याएं बढ़ीं। महिलाओं, बच्चों का कुपोषण बढ़ा। इतना ही नहीं विद्यार्थियों की शिक्षा खतरे में पड़ी।”
बयान में कहा गया है, “नोटबंदी के बाद जरूरत के लिए अपना ही जमा पैसा निकालने के लिए बैंक और एटीएम की लाइन में लगे लगभग 150 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई, इतना ही नहीं तनाव की वजह से दर्जन भर से ज्यादा बैंक कर्मचारी मर गए।”
बयान के अनुसार, “नोटबंदी कुछ औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए की गई है। दूसरी ओर कैशलैस इंडिया, डिजिटल कैश की बात कर देश पर आर्थिक तानाशाही थोपने का जरिया बनी है।”
बयान में राज्य के कटनी जिले में हुए 500 करोड़ रुपये के घोटाले को दबाने का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाया गया है।
बयान में कहा गया है, “घोटाले को उजागर करने वाले पुलिस अधीक्षक का तबादला कर दिया गया, क्योंकि इसमें राज्य सरकार के एक मंत्री का नाम आ रहा था। राज्य सरकार के विरोध में एक राजनीतिक दल के आंदोलन पर लाठीचार्ज किया गया, जिसमें उस दल का प्रदेशाध्यक्ष भी घायल हुआ। इस तरह भाजपा सरकार लोकतांत्रिक विरोध को कुचलना चाहती है।”
बयान में मंत्री पाठक और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की गई है और 26 से 31 जनवरी तक चलने वाले आंदोलन में दोनों के पुतले दहन करने की भी घोषणा की गई है।
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