नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के लापता छात्र नजीब अहमद के मामले में नौ विद्यार्थी जांच में सहयोग नहीं दे रहे।
पुलिस ने बताया कि उन्होंने जांच में शामिल होने के लिए विद्यार्थियों को नोटिस भेजे, लेकिन नौ विद्यार्थी जांच में शामिल होने के लिए अब तक सामने नहीं आए हैं, जिससे उन पर मामले में संलिप्तता का संदेह पैदा होता है।
न्यायाधीश जी. एस. रोहिणी और न्यायाधीश विनोद गोयल की खंडपीठ को पुलिस अपराध शाखा ने बताया कि जेएनयू के कुलपति के माध्यम से इन नौ विद्यार्थियों को नोटिस भेजा गया, लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हुए।
पुलिस के वकील राहुल मेहरा ने अदालत को बताया, “ये विद्यार्थी चूंकि पूछताछ में शामिल होने के लिए सामने नहीं आए, इससे मामले में उनकी संलिप्तता का संदेह पैदा होता है।”
सुनवाई के दौरान संदिग्ध नौ विद्यार्थियों में से एक विद्यार्थी अदालत के सामने पेश हुआ और अपने खिलाफ पक्षपातपूर्ण जांच का आरोप लगाया और निष्पक्ष जांच की मांग की।
इस पर मेहरा ने कहा कि पुलिस अपराध शाखा जिम्मेदारीपूर्वक मामले की जांच कर रही है और अगर वह पक्षपात करती तो उन्हें हिरासत में ले चुकी होती।
पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि मामले में याचिकाकर्ता नजीब की मां को फोन कर नजीब की रिहाई के बदले 20 लाख रुपये की फिरौती मांगने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
अभियोजन पक्ष के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्वेज ने अदालत से कहा कि संदिग्ध नौ विद्यार्थियों का पुलिस विशेष खयाल रख रही है और अब तक उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ नहीं की गई है।
अदालत ने मामले की सुनवाई 13 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है और पुलिस को नजीब की तलाश जारी रखने का निर्देश दिया है।
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