कोलकाता, 27 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के भांगर में ‘जबरन भूमि अधिग्रहण’ के विरोध में ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद सड़कों से अवरोध हटाए जाने से हालात सामान्य होते नजर आए।
ग्रामीणों ने अवरोधों को हटाने का फैसला आम लोगों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए लिया। भांगर में बिजली ग्रिड की एक परियोजना के लिए ‘जबरन भूमि अधिग्रहण’ किए जाने के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन से हालात बिगड़ गए।
आंदोलनकारियों ने गुरुवार को कई स्थानों पर सड़कों को अवरुद्ध करना शुरू कर दिया था। वे भाकपा नेता शर्मिष्ठा चौधरी को रिहाई की मांग को लेकर सड़कों को अवरुद्ध कर रहे थे।
चौधरी को भांगर में हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जिसमें बीते सप्ताह दो लोगों की जान चली गई।
राज्य सरकार ने बीते बुधवार को भांगर हिसा मामले की जांच पश्चिम बंगाल आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को सौंप दी। मामले में जिला अदालत ने गुरुवार को चौधरी को 3 फरवरी तक के लिए सीआईडी की हिरासत में भेज दिया।
भाकपा के सदस्य अलिक चक्रवर्ती ने कहा, “हमने आम लोगों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए सभी तरह के अवरोधों को हटाने का फैसला किया है। हम 30 जनवरी को कोलकाता में एक प्रदर्शन रैली का आयोजित करेंगे।”
चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन और पुलिस प्रदर्शन को दबाने के लिए बल का प्रयोग करते हैं तो ग्रामीण फिर प्रदर्शन शुरू कर सकते हैं।
हालांकि, चक्रवर्ती ने कहा कि ग्रामीणों का सरकार के साथ विचार-विमर्श का रास्ता खुला हुआ है।
भांगर का राजनीतिक हिंसा का इतिहास रहा है। यहां बीते सप्ताह 16 एकड़ खेती की भूमि के जबरन अधिग्रहण को लेकर हिंसा भड़क गई। यह भूमि खमारैत, मच्छी भंगा, टोना और पदमपुकुर गांवों में है। यह भूमि राज्य सरकार पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के लिए अधिग्रहित कर रही है।
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