नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। सार्वभौमिक बुनियादी आय (यूबीआई) योजना जिसका उल्लेख सरकार के इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण में किया गया है। उसमें आय की कट ऑफ सीमा तय होनी चाहिए तथा स्वैच्छिक रूप से इसे छोड़ने को भी प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने यह बातें कही।
बसु वर्तमान में कॉरनेल विश्वविद्यालय में अर्थशा के प्रोफेसर है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “यूबीआई योजना में आय की कट ऑफ सीमा तय होनी चाहिए तथा स्वैच्छिक रूप से इसे छोड़ने को भी प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।”
पिछले महीने जारी आर्थिक सर्वेक्षण में यूबीआई योजना की सिफारिश की गई थी, ताकि देश में गरीबी हटाने के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जगह पर इस एक योजना को लागू किया जाए।
मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने इस सर्वेक्षण को लिखा था और उन्होंने गरीबी रेखा से नीचे रहनेवालों के लिए नकद राशि के हस्तांतरण की इस योजना की सिफारिश की।
सुब्रमण्यम ने कहा, “योजना के तहत हरेक नागरिक को बिना पूर्व शर्त के 10,000 से 15,000 रुपये दिए जाएं। इसके बदले में गरीबी हटाने के लिए चलाई जा रही 1000 से अधिक योजनाओं को खत्म कर दिया जाए।”
इस दौरान नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने हाल के एक साक्षात्कार में कहा था कि देश के पास इस योजना को लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं है।
तेंदुलकर समिति ने शहरी गरीबी की सीमा वित्त वर्ष 2011-12 की कीमतों के आधार पर 1,000 रुपये मासिक तय की थी।
dharmpath.com dharmpath