पटना, 22 फरवरी (आईएएनएस)। बिहार भूदान यज्ञ समिति के अध्यक्ष कुमार शुभमूर्ति ने यहां बुधवार को कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली हिंसा निहित है। वह उसकी सामग्री और प्रक्रिया दोनों में है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में बदलाव नहीं होगा तब तक शिक्षा में बदलाव नहीं हो सकता।
पटना के ए़ एऩ सिन्हा सामाजिक शोध संस्थान में बिहार भूदान यज्ञ समिति और समुदाय द्वारा ‘हिंसा और युद्ध के खिलाफ खड़ी गांधी की शिक्षा पद्धति’ पर आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में शुभमूर्ति ने कहा, “महात्मा गांधी ने शिक्षा को लेकर काफी विचार किया और कई प्रयोग किए। अंत में उन्होंने देश के सामने बुनियादी तालीम की अवधारणा रखी। साथ ही बुनियादी तालीम की इस अवधारणा को उन्होंने अपने सत्याग्रह की अवधारणा से ज्यादा कीमती बताया।”
कनाडा से आए भारतीय मूल के विद्वान रामशंकर सिंह ने कहा कि छात्रों की रचनात्मक सामाजिक सक्रियता बढ़ाई जानी चाहिए, विशेषकर छात्रों के नेतृत्वगुण को प्रोत्साहित करना चाहिए।
सेमिनार में तेनजिन सुंदु ने कहा, “हिंद स्वराज ने मेरी जीवन को बदल दिया। साथ ही मैंने हिंद स्वराज को कई तिब्बती लोगों को पढ़ाया है।”
उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में मानवीय मूल्यों को स्थापित करने के लिए लगातार संघर्ष करते रहना चाहिए।
आस्ट्रेलिया से आए एडवर्ड ने शिक्षा प्रणाली को लेकर कई देशों की प्रणालियों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि बच्चों को 14 वर्ष तक किसी भी प्रतिद्वंदिता से अलग रखकर शिक्षा देने की प्रक्रिया होनी चाहिए। एडवर्ड ने बताया, “डेनमार्क और फिनलैंड में 15 वर्ष तक बच्चे बिना कोई परीक्षा दिए ही पढ़ते हैं। इस पढ़ाई में खेल और गीत पर ध्यान दिया जाता है।”
सेमिनार में बिहार सरकार के वित्तमंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि वर्तमान शिक्षा पद्धति गरीब विरोधी है। गरीबी को कायम रखने और इसकी खाई को चौड़ा करने में इस शिक्षा पद्धति का बड़ा हाथ है।
इस सेमिनार में प्रो़ ए़ क़े चौधरी, विनय कंठ, उषा किरण खान सहित कई लोगों ने संबोधित किया।
उषा किरण खान ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में जब हिंसा का बोलबाला है इस कारण अब गांधी के विचारों से शिक्षा देने पर जोर दिया जाना चाहिए।
सेमिनार के अंत में दलाई लामा के जीवन पर आधारित एक फिल्म भी लोगों को दिखाई गई।
इस सेमिनार में विभिन्न कॉलेजों के छात्र भी उपस्थित थे।
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