कोलकाता, 4 मार्च (आईएएनएस)। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने शनिवार को कहा कि एक ही वक्त में आर्थिक व राजनीतिक विकास भारत के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
उन्होंने कहा, “भारत एक ही वक्त में आर्थिक व राजनीतिक विकास का प्रयास कर रहा है। मुझपर विश्वास कीजिए, यह बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि भारतीय समाज में लोगों, धर्म, जाति, संस्कृति, भाषा, लिंग, क्षेत्र के बीच काफी अंतर है।”
शिबपुर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी में चौथे वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “समाज में विभिन्न समूहों के लोगों के बीच एक ही वक्त में आर्थिक व राजनीतिक विकास का प्रयास करना बेहद चुनौतीभरा कार्य है।”
उन्होंने कहा, “इसलिए जब हम भारत के आर्थिक प्रदर्शन के बारे में बात करते हैं, तो हमें अपने दिमाग में इस बात को बिठाए रखना होता है कि हम बेहद कठिन तथा आश्चर्यजनक काम कर रहे हैं।”
उन्होंने हालांकि कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बुरा नहीं है।
सुब्रमण्यम ने कहा, “बेहद कम लोकतांत्रिक देश हैं, जिन्होंने दीर्घावधि तक विकास की रफ्तार बनाए रखा है, उनमें से बहुत कम देशों ने कम समय में गरीबी को दूर किया है और भारत जैसे कुछ ही देश ने विज्ञान में आश्चर्यजनक उपलब्धियां हासिल कीं।”
उनके मुताबिक, विकास का पहला मॉडल धीमे आर्थिक व राजनीतिक विकास से संबंधित है, जबकि दूसरा सफल मॉडल वह है जिसमें आर्थिक विकास पहले होता है, जबकि राजनीतिक विकास बाद में।
सुब्रमण्यम ने कहा, “भारत पर विकास का उपरोक्त दोनों में से कोई भी मॉडल लागू नहीं होता।”
विकास की बात करें, तो चीन, दक्षिण कोरिया तथा ताइवान जैसे कुछ ही देश कम समय में सफल रहे हैं, लेकिन या तो उन्होंने निरंकुश या तानाशाह रवैया अपनाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि इन देशों ने ‘पहले आर्थिक विकास’ किया, तब ‘राजनीतिक विकास और लोकतंत्र।’
अन्य देशों की तरह भारत में भी चुनौतियां हैं। स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में देश पिछड़ गया है और पर्यावरण स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है।
संस्थान ने सुब्रमण्यम को मानद उपाधि प्रदान की।
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