मुंबई, 22 मार्च (आईएएनएस)। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे ने बुधवार को 19 विपक्षी विधायकों को 31 दिसंबर तक के लिए निलंबित कर दिया। इन विधायकों ने बजट पेश करने के दौरान बीते शनिवार कृषि कर्ज को माफ करने की मांग को लेकर हंगामा किया था।
तीन दिनों बाद विधानसभा की बैठक शुरू होने पर संसदीय कार्य मंत्री गिरीश बापट ने एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के विधायकों के निलंबन की मांग की गई थी। इन विधायकों ने वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार के बजट भाषण के दौरान बाधा डाला था।
इस प्रस्ताव के पक्ष में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और उसके गठबंधन सहयोगी शिव सेना के सदस्यों ने मतदान किया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने निलंबन का आदेश जारी किया।
मुनगंटीवार ने शनिवार को 2017-18 का बजट हंगामे के बीच प्रस्तुत किया, क्योंकि संयुक्त विपक्ष राज्य में कृषि ऋण पूरी तरह माफ करने की मांग कर रहा था।
विपक्षी दलों ने निलंबन के आदेश का प्रदर्शन कर स्वागत किया और कहा कि सरकार ने एक कटौती प्रस्ताव पर हार से बचने के लिए यह उपाय किया, जिसमें सदन में मत विभाजन का प्रावधान है।
विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटील ने सरकार पर किसानों की दुर्दशा पर असंवेदनशील होने का आरोप लगया। पाटील ने कहा कि सरकार निलंबन जैसे अलोकतांत्रिक तरीके का सहारा लेकर विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बुधवार को निलंबित विधायकों में कांग्रेस के 9 और राकांपा के 10 सदस्य शामिल हैं। इन पर विधानसभा परिसर में दाखिल होने पर भी रोक है।
इसमें दोनों पार्टियों के दिग्गज विधायक भास्कर जाधव, विजय वद्देतीवार, जितेंद्र आव्हाड, डी.पी.सावंत, अब्दुल सत्तार और अवधूत तटकरे शामिल हैं।
ये उन विपक्षी सदस्यों में शामिल रहे, जिन्होंने नारे लगाए और विधानसभा में बैनर लहराए, भजन गाए और बाद में बजट की प्रतियों को आग लगा दी।
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