उन्होंने कहा, “वह विपक्षी एकता के सूत्रधार थे। कांग्रेस के विरोध में उन्होंने सभी विपक्षी दलों को एकजुट किया। राम मनोहर लोहिया के जीवन आदर्शो व सिद्धांतों से प्रेरणा प्राप्त करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
राज्यपाल ने कहा कि डॉ. लोहिया का अनेक विदेशी भाषाओं पर अधिकार था, लेकिन उनका मत था कि हिंदी व क्षेत्रीय भाषाओं का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग हो। मुंबई में समाजवादी नेताओं के साथ मिलकर उन्होंने भारतीय भाषाओं के विकास के लिए आयोजन किया था, जिसमें लोहिया जी स्वयं उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि कई बार लोहिया जी से मिलने और सुनने का मौका मिला।
राज्यपाल ने बताया, “लोहिया जी ने कहा था कि लोग मेरी बात सुनेंगे जरूर, लेकिन मेरे मरने के बाद। यह वाक्य उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है। वे एक दार्शनिक थे। लोहिया कार्ल्स मार्क्स के विचारों को अधूरा मानते हुए कहते थे कि उसे भारतीय पृष्ठभूमि से जोड़ने की आवश्यकता है।”
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