सर्वोच्च न्यायालय का अयोध्या मामले में जल्द सुनवाई से इनकार (लीड-1)

नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को विवादित रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर अधिकार के मुकदमे पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर की अगुवाई वाली पीठ ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी से कहा कि फिलहाल कई काम करने हैं, कई मामलों पर सुनवाई करनी है, ऐसे में अभी इस याचिका पर सुनवाई करने के लिए उसके पास समय नहीं है।

पीठ ने सुब्रमण्यम स्वामी को आड़े हाथ लेते हुए कहा, “हमें मीडिया से पता चला है कि आप इस मामले में पक्ष नहीं हैं।”

स्वामी ने न्यायालय से कहा कि अयोध्या में रामलला मंदिर में प्रार्थना करने के अधिकार के लिए मामले की जल्द सुनवाई करने की मांग करने वाली उनकी रिट याचिका हस्तक्षेप याचिका के रूप में तब्दील हो गई है।

स्वामी ने 21 मार्च को न्यायालय से मामले में जल्द सुनवाई किए जाने का आग्रह किया था। यह मामला अदालत के सामने कई वर्षो से लंबित पड़ा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 21 मार्च को कहा था कि अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का निपटारा न्यायिक फैसले की तुलना में बातचीत के माध्यम से बेहतर तरीके से हो सकता है।

स्वामी ने सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया था कि वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा साल 2010 में दिए गए आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं की सुनवाई के लिए एक पीठ की स्थापना करे, क्योंकि मामला बीते छह वर्षो से लंबित है। इसके बाद प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 21 मार्च को उपरोक्त टिप्पणी की थी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में विवादित स्थल का तीन हिस्सा कर एक हिस्सा निर्मोही अखाड़ा को दूसरा रामलला को तथा तीसरा हिस्सा मुसलमानों को दिए जाने का आदेश दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2011 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाते हुए इसे एक दुर्लभ फैसला करार दिया था।

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