नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी और तेल अवीव विश्वविद्यालय ने मिडल ईस्ट फोरम के सहयोग से शुक्रवार को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में ‘इंडिया-इजराइल एकेडमिक डायलॉग: पोलिटिकल एंड कल्चरल क्रॉसिंग्स’ विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया।
दोनों देशों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक विशिष्टताओं को ध्यान में रखते हुए उनके अवसरों और चुनौतियों को समझने के लिए आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन जिंदल सेंटर फॉर इजराइल स्टडीज (जेसीआईएस) द्वारा किया गया।
भारत में इजराइल के राजदूत डेनियल कैरमन ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, “भारत और इजराइल को विरासत, संस्कृति, मूल्य और हितों के मामले में एक-दूसरे के बारे में बहुत कुछ जानने की जरूरत है। मैं समझता हूं कि जिंदल सेंटर फॉर इजराइल स्टडीज की ओर से आयोजित इस सम्मेलन के जरिये जो कुछ हो रहा है, वह इसी लक्ष्य को पाने के ख्याल से किया जा रहा है। हम एक लंबा सफर तय कर चुके हैं लेकिन हमारी आगे की राह में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।”
दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा करते हुए सांसद और विदेश मामलों पर संसदीय स्थायी समिति के चेयरमैन डॉ. शशि थरूर ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने के लिए शिक्षण संस्थानों में अपार शक्ति है।
उद्घाटन सत्र में ही लैटिन अमेरिकन व स्पैनिश इतिहास के प्रोफेसर तथा तेल अवीव विश्वविद्यालय के वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर रानन रेन ने कहा, “मूल्यों और चुनौतियों के मामले में भारत और इजराइल की परिस्थितियों में काफी समानता है। दोनों देश जानते हैं कि वे बहुनस्लीय, बहु सांस्कृतिक और बहुधर्मों का पालन करने वाले देश हैं और शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी के लिए यह एक मजबूत आधार बनता है।”
भारतीय और इजराइली शिक्षाविदों के बीच परस्पर सांस्कृतिक वार्ता का लक्ष्य दोनों समाजों की जटिल प्रकृति की बेहतर समझ प्रदान करना और भविष्य की साझेदारी के लिए साझा हितों की खोज करना है। भारतीय शिक्षा के संदर्भ में जेएसआईए स्थित जिंदल सेंटर फॉर इजराइल स्टडीज 2012 में अपनी स्थापना के बाद से ही इजराइली स्टडीज के मामले में शीर्ष पर रहा है।
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