बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों की नियुक्ति का आदेश

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए राज्यों को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम के तहत राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति के लिए चार सप्ताह का वक्त दिया।

अधिनियम की धारा 18 आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति की बात करती है। इसका पालन न होता देख न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर तथा न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने अधिनियम का पालन न करने वाले प्रत्येक राज्य पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे शीर्ष न्यायालय की कानूनी सहायता सोसायटी के पास जमा कराना होगा।

धारा 18 के मुताबिक, अध्यक्ष की नियुक्ति तीन सदस्यीय चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर होनी चाहिए। इस चयन समिति का गठन राज्य सरकार द्वारा बाल अधिकारों के मामलों से निपटने वाले विभाग के मंत्री की अध्यक्षता में होना चाहिए।

न्यायालय का यह आदेश संपूर्ण बेहुरा द्वारा दाखिल उस जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है, जिसमें बाल केंद्रित कानूनों के लागू करने की मांग की गई है।

अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल ने पीठ से कहा कि सभी राज्यों में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की स्थापना की गई है, लेकिन राज्यों ने केंद्र सरकार से आयोग की संरचना के बारे में कुछ नहीं कहा है।

उन्होंने कहा, “हमने एक मार्च को संपूर्ण विवरण मांगा, ई-मेल तथा टेलीफोन कॉल के बाद एक बार फिर पत्र लिखा और वे (राज्य) इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं मानो वे हम पर कोई अहसान कर रहे हैं।”

उन्होंने नियम का पालन नहीं करने वाले राज्यों के खिलाफ मानहानि का मामला शुरू करने का आग्रह किया।

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