मुंबई, 8 मई (आईएएनएस)। फिल्म ‘पिंक’ के निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी अपनी लघु फिल्म ‘बैजू बुली’ लेकर आए हैं, जो पानी की कमी से जूझ रहे एक अभावग्रस्त गांव की कहानी है। निर्देशक ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उनके ऊपर सत्यजीत रे का काफी प्रभाव है।
मुंबई, 8 मई (आईएएनएस)। फिल्म ‘पिंक’ के निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी अपनी लघु फिल्म ‘बैजू बुली’ लेकर आए हैं, जो पानी की कमी से जूझ रहे एक अभावग्रस्त गांव की कहानी है। निर्देशक ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उनके ऊपर सत्यजीत रे का काफी प्रभाव है।
रॉय ने कहा, “मुझे इस फिल्म पर काम करने में वास्तव में मजा आया। हम रे (बांग्ला फिल्मकार) के काम से बेहद प्रभावित हैं। अकाल और गरीबी पर आधारित फिल्म बनाने के दौरान रे के बारे में नहीं सोचना मेरे लिए नामुमकिन है। मैं रे और ऋत्विक घटक के कामों को देखते हुए बड़ा हुआ हूं।”
ग्रामीण भारत में रानी की कमी की समस्या को लेकर निर्देशक बेहद दुखी हैं।
उन्होंने कहा कि यह समस्या वास्तविक और गंभीर है, लेकिन इसे पर्याप्त रूप से गंभीर समस्या के तौर पर नहीं देखा जाता। फिल्म ‘बैजू बुली’ जैसे छोटे प्रयास से बदलाव लाया जा सकता है और शहरी आबादी को पानी के संरक्षण के लिए जागरूक किया जा सकता है।
रॉय ने बताया कि दो युवा पात्रों बुली (राकेश ठाकरे) और बैजू (आदित्य पवार) को चुनना आसान नहीं था।
कई कलाकारों का ऑडिशन लिया गया। फिल्म की निर्माता व उनकी पत्नी इंद्राणी ने कास्टिंग डायरेक्टर की सहयता से कई बच्चों का ऑडिशन लिया। राकेश और आदित्य निर्देशक को पसंद आ गए और उनके साथ कुछ दिनों का वर्कशॉप किया गया।
चौधरी का मानना है कि पानी की समस्या को सिनेमा और संचार के अन्य माध्यमों के जरिए दर्शाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह पानी की समस्या को दिखाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह फिल्म इसी उद्देश्य के साथ बनाई गई है। मौजूदा दौर में भी सामाजिक, आर्थिक चुनौती का सामना करने वाले लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं।
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