नयी दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। रोजगार पर घिरे संकट से गुस्साए दक्षिणी दिल्ली के यूसुफ सराय बाजार के दुकानदारों ने बुधवार को एक आक्रोश रैली के साथ काला किराया कानून की शव-यात्रा निकाली।
ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन से शुरू हुए इस प्रदर्शन में सैकड़ों दुकानदार, उनके परिजन और दुकानों में काम करने वाले लोग शामिल थे। प्रदर्शनकारी दुकानदार 40-50 साल से अधिक समय से अपनी पगड़ी की दुकान में अपना व्यापार कर रहे थे। उनका आरोप है कि इन दुकानों को अब जबरन और अनैतिक रूप से बोनाफाइड कानून की आड़ में भू-माफियों की सह से खाली कराया जा रहा है।
यूसुफ सराय व्यापार संघ के अध्यक्ष मुकेश शर्मा ने कहा, “यूसुफ सराय मार्केट में 1,000 से अधिक दुकाने हैं, जिनमें से 100 से अधिक दुकानों को अवैध रूप से खाली कराया जा चुका है और 100 से अधिक दुकानों को कानूनी नोटिस मिल चुका है। मार्केट का हर दुकानदार इस बात से भयभीत है कि कल उसकी रोजी-रोटी रहेगी या नहीं। पूरे मार्केट के लोग एक-दूसरे के साथ हैं और हम अपने किसी भी दुकानदार के साथ यह अन्याय नहीं होने देंगे, चाहे उसके लिए हमें किसी भी हद तक क्यों न जाना पड़े।”
साल 1996 मे 11 लाख रुपये देकर अपनी दुकान पगड़ी के रूप में खरीदने वाले एक और दुकानदार हिलाल बक्तो ने कहा, “पूरी कीमत देने के बाबजूद दुकान खाली करने का नोटिस आ चुका है। नोटिस पीरियड का टाइम इतना कम होता है कि आप सारे कागजात भी इकट्ठा नहीं कर सकते।”
पगड़ी दुकानदारों के अधिकारों के लिए लड़ रही संस्था राजधानी पगड़ी किरायेदार संगठन के अध्यक्ष रवि कुमार गर्ग ने कहा, “हमारी प्रमुख मांग है कि अन्य राज्यों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, की तरह यहां पर भी संतुलित किराया कानून लागू की जाए, जिससे न तो मकान मालिक का नुकसान हो और न पगड़ी दुकानदार का। दिल्ली में समरी प्रोसेस लागू न हो, जिसमें पगड़ी दुकानदार का केस रिजेक्ट न हो। प्रॉपर्टी मालिक को अपनी जरूरत सिद्ध करने के लिए वास्तविक प्रमाण देना होगा न कि अनुचित तरीके जैसे सीढी बड़ा करना, छज्जा बनाना, गाड़ी खड़ी करने के लिए पार्किं ग बनाना जैसे अनुचित तथ्य हों। साथ ही साथ समीक्षा की जानी चाहिए कि जरूरत किसकी ज्यादा है, मकान मालिक की या किरायेदार की। इसके साथ ही प्रॉपर्टी मालिक केवल एक ही दुकान अपने उपयोग के लिए खाली करा सकता है।”
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