प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के तरीके मध्यप्रदेश से सीखें : मोदी (फोटो सहित)

अमरकंटक (मध्यप्रदेश), 15 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां सोमवार को मध्यप्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए अपनाए जा रहे तौर-तरीकों की सराहना करते हुए कहा कि इससे अन्य राज्यों को सीखना चाहिए।

‘नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा’ पूर्णता समारोह के मौके पर नर्मदा नदी के उद्गम-स्थल अनूपपुर जिले के अमरकंटक में जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे यहां कहा जाता है जो एक साल का सोचता है, वो अनाज बोता है और जो भविष्य का सोचता है वह फलदार वृक्ष बोता है। ये फलदार वृक्ष आने वाले समय में कई परिवारों के लिए अर्थोपाजन की गारंटी भी बन जाते हैं।”

उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के संरक्षण अभियान को लेकर जो कार्ययोजना बनाई है, उसमें हर व्यक्ति के लिए काम है, हर जगह के लिए काम है, कब करना और कैसे करना है, उसका विधि-विधान है, कौन किस काम को देखेगा, इसका ब्यौरा है, एक हिसाब से फ्यूचर विजन का परफेक्ट डॉक्यूमेंट है।”

प्रदेश सरकार ने तय किया है कि नर्मदा नदी के दोनों तटों पर एक-एक किलोमीटर तक फलदार पेड़ों के पौधे लगाए जाएंगे और पहले तीन वर्ष तक सरकार किसानों को मुआवजा देगी, क्योंकि इन पेड़ों में फल कम से कम तीन साल बाद ही फलेंगे।

मोदी ने कहा कि वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहेंगे कि वह कार्ययोजना की किताब अन्य राज्यों को भी भेजें, ताकि वे प्राकृतिक संसाधन की रक्षा का तरीका क्या होता है, उसे उदाहरण के तौर पर लेकर अपने-अपने राज्य में योजना बनाकर लागू करें।

उन्होंने आगे कहा कि जल ही जीवन है, नदी माता है, यह तो कहते हैं, मगर हमारी सारी अर्थव्यवस्था उसी पर आधारित होती है। उसके बिना अर्थव्यवस्था खोखली हो जाती है, मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर 20 प्रतिशत पहुंची तो उसमें सबसे बड़ा योगदान नर्मदा का है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “नर्मदा में किसान की जिंदगी बदलने की ताकत है। 2022 तक किसान की आय दोगुना करने का काम पूरे देश में चल रहा है, मध्यप्रदेश ने उसकी पूरी योजना तैयार कर दी है, जिसका लाभ देश को मिलेगा।”

मोदी ने मुख्यमंत्री शिवराज की योजनाओं और उनकी कार्यशैली की जमकर सराहना की। साथ ही कहा कि 148 दिन चली यात्रा ‘नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा’ को प्रदेश के लोगों का भरपूर साथ मिला है।

उन्होंने कहा, “नदी संरक्षण का इस तरह का अभियान दुनिया के किसी और देश में चला होता, तो उसकी दुनियाभर में चर्चा हो रही होती.. मीडिया इस अभियान के पीछे भागा भाग जाता, मगर इस यात्रा के साथ ऐसा नहीं हुआ, यह हमारा दुर्भाग्य है।”

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