बीजापुर, 24 मई (आईएएनएस/वीएनएस)। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए 96 घंटे के महाअभियान में 15 से 20 नक्सलियों को मार गिराने के पुलिस के दावे को नक्सली कमांडर और खुफिया प्रभारी जगदीश इरपा ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस अभियान और मुठभेड़ में न तो उनका कोई साथी मारा गया है और न ही घायल हुआ है।
बीजापुर, 24 मई (आईएएनएस/वीएनएस)। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए 96 घंटे के महाअभियान में 15 से 20 नक्सलियों को मार गिराने के पुलिस के दावे को नक्सली कमांडर और खुफिया प्रभारी जगदीश इरपा ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस अभियान और मुठभेड़ में न तो उनका कोई साथी मारा गया है और न ही घायल हुआ है।
नक्सली कमांडर ने बताया कि बुरकापाल में उसके सिर्फ दो साथी मारे गए थे, जिनमें से एक तेलंगाना के चेरला और दूसरा बीजापुर के लिंगापुर का रहने वाला था।
रायगुड़ा आगजनी मामले की पड़ताल के लिए संवाददाता जब ग्रामीणों से घटना की जानकारी ले रहे थे, तभी अत्याधुनिक हथियारों से लैस करीब 8-10 नक्सली वहां पहुंचे और पूछताछ करने लगे। जब उन्हें यह जानकारी दी गई कि पत्रकार हैं और आगजनी मामले की पड़ताल करने गांव आए हैं, तो उन्होंने ‘हमें अपने साथ जंगल की ओर चलने का इशारा किया।’
जंगल की ओर कुछ दूर जाने के बाद ‘हमें एक जगह पर उस दल के कमांडर ने बताया कि उसका नाम जगदीश इरपा है तथा वह उस इलाके का डीवीसी कमांडर और खुफिया प्रभारी है।’
इरपा ने कहा कि वह रायगुड़ा और बुरकापाल मामले में मीडिया में अपना बयान देना चाहता है। उसने बताया कि इस अभियान में पुलिस 15 से 20 नक्सलियों को मार गिराने का जो दावा कर रही है, वह गलत है। गांव के घरों में आग लगाकर वापस जा रहे जवानों पर हमारे पीएलजीए के सदस्यों द्वारा हमला किया गया था, जिसमें हमारा कोई भी साथी न तो घायल हुआ है और न ही मारा गया है। जबकि हमले में सुरक्षाबलों के दो जवान घायल हो गए। नक्सली कमांडर ने बताया कि बुरकापाल हमले में नक्सलियों के चार प्लाटून शामिल थे।
उसने यह भी कहा कि हाल में राजनाथ सिंह ने नक्सल समस्या के समाधान के लिए दिल्ली में 10 राज्यों की बैठक ली थी, जिसमें कई निर्णय लिए गए थे। इसका परिणाम रायगुड़ा गांव में देखने को मिला है। उसने कहा कि क्या सरकार घरों में आग लगाकर इस समस्या का समाधान करेगी।
नक्सल कमांडर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और सुरक्षाबलों के जवानों से उनकी कोई दुश्मनी नहीं है, पर सरकार ने अपने मतलब के लिए उन्हें बस्तर में तैनात किया है। उनके द्वारा बस्तर में ग्रामीणों और महिलाओं के साथ जो अत्याचार किया जा रहा है, उसका बदला लेने के लिए उन पर हमले किए जाते हैं।
नक्सल कमांडर ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि दुर्दात नक्सली कमांडर पापाराव को ग्रेहाउंड्स जवानों के साथ हुई मुठभेड़ में गोली लगी थी, जो पेट को चीरते हुए निकल गई थी।
विदित हो कि पूवर्ति इलाके में चलाए गए अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान के बाद बुधवार को सीआरपीएफ के आईजी देवेंद्र चौहान ने बीजापुर में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस अभियान में 15 से 20 नक्सलियों को मार गिराने का दावा किया था।
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