नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता तथा सांसद सुष्मिता देव ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को ‘लैंगिक रूप से संवेदनशील’ बनाने में नाकामी के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की है।
देव की यह टिप्पणी सैनिटरी नैपकिन को सस्ता तथा कर मुक्त करने की मांग को केंद्र सरकार द्वारा खारिज करने के बाद आई है।
उन्होंने कहा, “जीएसटी लागू कर भारत इतिहास रचने जा रहा है, जबकि महिला सशक्तिकरण को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। बार-बार की मांग के बावजूद भाजपा सरकार जीएसटी को लैंगिक रूप से संवेदनशील बनाने में नाकाम रही।”
देव ने एक बयान में कहा, “सैनिटरी नैपकिन को कर मुक्त न कर केंद्र सरकार ने भारत की आधी आबादी की मांग के प्रति असंवेदनशीलता दिखाई है।”
उन्होंने कहा, “मेरी दरख्वास्त को तीन लाख से अधिक पुरुषों तथा महिलाओं का समर्थन मिलने के बावजूद कुछ नहीं हुआ। केंद्रीय मंत्री जे.पी.नड्डा, मेनका गांधी तथा अरुण जेटली के साथ मेरी बैठक के दौरान कोई भी इस बात से असहमत नहीं दिखे कि मासिक धर्म अभी भी समाज में एक कलंक की तरह है।”
देव ने कहा, “भारत में केवल 12 फीसदी महिलाएं ही नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं और मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता न बरतना स्वास्थ्य संबंधित गंभीर बीमारियों और यहां तक कि महिलाओं की मौत का कारण है, खासकर भारत के ग्रामीण इलाकों में।”
उन्होंने कहा, “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान का संचालन करने वाली सरकार ने वास्तव में दिमाग से काम नहीं लिया। इस नारे से लिंगानुपात तथा शिक्षा प्रणाली से अलग रहने वाली लड़कियों को लक्षित किया गया है और तब इस बारे में बिना दिमाग से काम नहीं लिया गया।”
देव ने कहा कि महंगा होने तथा आसानी से उपलब्ध न होने के कारण ही देश में नैपकिन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का आंकड़ा निराशाजनक है।
उन्होंने कहा, “हमारा संविधान महिलाओं तथा बच्चों को विशेष कानून देता है, उसके बावजूद भारत की आधी आबादी की मांग को भाजपा सरकार ने खारिज कर दिया।”
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